खैरागढ़. देश की सीमाओं पर दिन-रात तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई ने रक्षासूत्र तैयार कर उन्हें भेंट किए। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस पहल के माध्यम से विभाग ने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले सैनिकों को आत्मीयता और सम्मान का संदेश दिया।
वीर जवान केवल देश की सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि उनके अदम्य साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा से करोड़ों देशवासियों के जीवन में सुरक्षा और सुकून का विश्वास कायम रहता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने जवानों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह विशेष पहल की।
विभाग प्रमुख प्रीतराम खुटेल के मार्गदर्शन में विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने स्नेह और सम्मान के साथ रक्षासूत्र तैयार किए। इन रक्षासूत्रों को देश की रक्षा के लिए अपने परिवार से दूर रहकर सीमाओं पर डटे वीर जवानों को भेंट किया गया।
विभाग की ओर से कहा गया कि रक्षासूत्र महज एक धागा नहीं है, बल्कि यह देश की रक्षा में सदैव तत्पर जवानों के प्रति बहनों के स्नेह, देशवासियों के सम्मान और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता का पवित्र बंधन है। यह उन सैनिकों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जो अपने परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे हैं।
रक्षासूत्र के माध्यम से विभाग ने जवानों को संदेश दिया कि सीमाओं पर उनके द्वारा किए जा रहे त्याग, तपस्या, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को पूरा देश सम्मान की दृष्टि से देखता है। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनका समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सैनिकों का शौर्य और बलिदान देश की आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।
इस अवसर पर विभाग प्रमुख प्रीतराम खुटेल सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों ने देश की रक्षा में समर्पित वीर जवानों के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
विभाग की इस पहल का भाव रक्षासूत्र के साथ भेजे गए संदेश में भी दिखाई दिया—
“हमने स्नेह से रक्षासूत्र बनाया है,
आपने साहस से देश को बचाया है।
इस पवित्र बंधन में हमारा सम्मान है,
आपके शौर्य को शत्-शत् प्रणाम है।”
रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले से भेजा गया यह रक्षासूत्र उन वीर जवानों के प्रति सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक बना, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं।


