खैरागढ़. छत्तीसगढ़ के पारंपरिक एवं लोकपर्व हरेली के अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अनूठी पहल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार जिले में टीबी रोग के उन्मूलन के साथ समुदाय को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
अभियान को हरेली पर्व की पारंपरिक संस्कृति से जोड़ते हुए गेड़ी दौड़ और रस्सी दौड़ जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को सहज और रोचक तरीके से टीबी के लक्षणों, समय पर जांच कराने तथा नियमित रूप से उपचार पूरा करने के महत्व की जानकारी दी जा रही है। पारंपरिक खेलों के बीच स्वास्थ्य संबंधी संदेश मिलने से ग्रामीणों की सहभागिता भी बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल टीबी के मरीजों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि समुदाय को इस बीमारी के प्रति जागरूक कर समय पर जांच, समय पर उपचार और उपचार का पूरा कोर्स सुनिश्चित करना है। विभाग का मानना है कि टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी, लगातार बुखार, वजन कम होना अथवा रात में पसीना आने जैसी शिकायत है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर टीबी की जांच जरूर कराएं। समय पर बीमारी की पहचान होने से उपचार शुरू किया जा सकता है और संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलती है।
हरेली जैसे पारंपरिक पर्व को स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़कर स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त भारत का संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया है। संस्कृति, मनोरंजन और जनजागरूकता के इस संगम को जनभागीदारी बढ़ाने और टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को मजबूत करने की बेहतर पहल माना जा रहा है।


