खैरागढ़. जिले की सरकारी शराब दुकान एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। पहले मिलावटी शराब और फर्जी होलोग्राम जैसे मामलों को लेकर सुर्खियों में रही यह दुकान अब कथित ओवररेटिंग, अव्यवस्था और दबंगई के आरोपों से चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान के बाहर ऐसा माहौल बन चुका है जहां “जल्दी शराब चाहिए तो निर्धारित कीमत से ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है।”
आरोप है कि दुकान के आसपास कुछ कथित असामाजिक तत्वों ने अपना अनौपचारिक नेटवर्क खड़ा कर लिया है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक शराब की बोतलों पर तय कीमत से 10 रुपये तक अधिक वसूली की जा रही है। जो ग्राहक इसका विरोध करते हैं, उन्हें गाली-गलौज, धमकी और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यह पूरा खेल सरकारी दुकान के आसपास खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
शाम होते ही दुकान के बाहर हालात और बिगड़ने लगते हैं। लंबी कतारें, धक्का-मुक्की, शोर-शराबा और अफरा-तफरी अब यहां रोजमर्रा की तस्वीर बन चुकी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था लगभग नदारद है। न पर्याप्त सुरक्षा गार्ड दिखाई देते हैं और न ही भीड़ नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी इंतजाम किए गए हैं। यही कारण है कि आए दिन विवाद, मारपीट, जेब कटने और चाकूबाजी जैसी घटनाओं की चर्चाएं इलाके में सुनाई देती रहती हैं।
सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की निगरानी को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यह दुकान पहले भी मिलावटी शराब, नकली होलोग्राम और नियमों के उल्लंघन जैसे मामलों को लेकर विवादों में रह चुकी है, तो फिर यहां व्यवस्था सुधारने और निगरानी बढ़ाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लोगों का आरोप है कि विभाग अक्सर शिकायत सामने आने के बाद केवल जांच और कार्रवाई का आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है।
गौरतलब है कि प्रदेश में सरकारी शराब दुकानों को लेकर पहले भी कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। रायपुर सहित कई जिलों में मिलावटी शराब, नकली होलोग्राम और कैश गड़बड़ी जैसे मामलों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में खैरागढ़ की दुकान को लेकर सामने आ रहे नए आरोप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।

मामले में जब खैरागढ़ आबकारी विभाग के अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि अब खैरागढ़ में सवाल सिर्फ जांच का नहीं, बल्कि भरोसे का बन चुका है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर सरकारी शराब दुकान में व्यवस्था कब दिखाई देगी? क्योंकि फिलहाल यहां शराब से ज्यादा अव्यवस्था बिकती नजर आ रही है।


