खैरागढ़. राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर जिला सिविल अस्पताल, खैरागढ़ में सेवा, संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान के तत्वावधान में 'हमर परिसर-हरियर परिसर' अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों का सम्मान किया गया और अस्पताल परिसर में मौलश्री व करंज सहित छायादार पौधों का रोपण कर हरित भविष्य का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान से जुड़े सेवाभावियों द्वारा जिला सिविल अस्पताल के चिकित्सकों को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं देकर उनके समाज और मानवता के प्रति अतुलनीय योगदान का सम्मान करने से हुई। इसके बाद अस्पताल परिसर में मौलश्री एवं करंज के पौधे लगाए गए। साथ ही पूर्व में लगाए गए पौधों की क्यारियों को व्यवस्थित कर उनकी सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड और सुरक्षात्मक जालियां भी लगाई गईं, ताकि पौधों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
मुख्य जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान के प्रकृति संरक्षण संबंधी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चिकित्सक मानव जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह प्रकृति के संरक्षण के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने लोगों से जन्मदिन, जयंती, विवाह वर्षगांठ और अन्य विशेष अवसरों को पौधारोपण से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि यही आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सच्ची जिम्मेदारी है।

आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान की ओर से सेवाभावी अनुराग शांति तुरे ने चिकित्सकों को समाज का वास्तविक संरक्षक बताते हुए कहा कि धरती पर यदि ईश्वर के बाद किसी को भगवान का दर्जा प्राप्त है तो वह चिकित्सक हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान डॉक्टरों द्वारा निभाई गई निस्वार्थ सेवा को याद करते हुए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध पंक्तियां— "क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो। उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत और सरल हो।" — चिकित्सा जगत को समर्पित कीं।
कार्यक्रम में सीएमएचओ डॉ. आशीष शर्मा के अलावा डॉ. विवेक बिसेन, डॉ. पंकज वैष्णव, नेत्र अधिकारी दुर्गेशनंदनी श्रीवास्तव, डॉ. मनीषा कश्यप, डॉ. तरुण साहू, डॉ. प्रदीप खूंटे, डॉ. घनश्याम बंजारे, डॉ. आकाश कन्नौजे तथा स्टाफ नर्स श्रद्धा वैष्णव सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। वहीं आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान के स्वयंसेवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं में उत्तम बागड़े, रूपेंद्र रजक, समसुल होदा खान, रूपेश देवांगन, गोविंद सोनी, अमीन मेमन, वंदना टांडेकर, नीलम राजपूत, संजय सिंह, चंदन गिरी, राजू यादव, संजय वालेचा, जीवेंद्र ठाकुर और प्रभात यादव ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान की ओर से कहा गया कि चिकित्सकों का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण, दोनों समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए समान रूप से आवश्यक हैं। अभियान ने जनभागीदारी के माध्यम से हरित, स्वच्छ और स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प दोहराते हुए लोगों से अधिकाधिक पौधारोपण कर उनके संरक्षण का आह्वान किया।


