खैरागढ़. शहर के किल्ला पारा स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में स्वर्गीय श्रीमती भावना श्रीवास्तव की प्रथम पुण्यतिथि की पावन स्मृति में आयोजित सात दिवसीय महाशिव पुराण कथा इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है। 18 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में 19 मई से महाशिवपुराण कथा की अविरल धारा बह रही है। प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात 7 बजे तक चल रही कथा का श्रवण करने नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूरा क्षेत्र शिवमय वातावरण में डूबा नजर आ रहा है।
इसी कड़ी में विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा सहित कांग्रेस नेताओं ने भी कथा स्थल पहुंचकर महाशिवपुराण कथा का श्रवण किया। इस दौरान उन्होंने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। विधायक वर्मा ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
कथा वाचन कर रहे कथावाचक रूपेश कृष्ण शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी और सुमधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। कथा के दौरान वे शिव महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन कर रहे हैं। इन दिनों कथा में रुद्राक्ष की महिमा, वीरभद्र की उत्पत्ति, सती जन्म, शिव-सती विवाह, माता पार्वती का जन्म एवं शिव-पार्वती विवाह जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वाचन किया जा रहा है।
कथावाचक ने रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि रुद्राक्ष केवल एक माला नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। इसे धारण करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है। वहीं वीरभद्र की उत्पत्ति का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जब राजा दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तब माता सती ने यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर लिया। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न किया, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का विनाश कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से अहंकार के विनाश और भक्ति की महिमा का संदेश दिया गया।
कथा में सती जन्म और शिव-सती विवाह का वर्णन भी अत्यंत भावपूर्ण ढंग से किया गया। कथावाचक ने बताया कि माता सती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। वहीं माता पार्वती के जन्म और शिव-पार्वती विवाह प्रसंग में भक्ति, समर्पण और तप की शक्ति को विस्तार से समझाया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर शिवभक्ति में लीन नजर आए।
कथावाचक के सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमते दिखाई दिए। पूरा कथा परिसर “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठा। संगीत नगरी खैरागढ़ इन दिनों पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगी नजर आ रही है।
इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान साकेत श्रीवास्तव एवं समृद्धि श्रीवास्तव हैं। आयोजन समिति में विमल कुमार श्रीवास्तव, अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, हर्षा श्रीवास्तव सहित परिवार एवं क्षेत्र के श्रद्धालु सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने की अपील की है।


