खैरागढ़. छुईखदान के टिकरापारा स्थित मंगल भवन में गुरुवार को 'नारी शक्ति सम्मेलन' का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन ने न केवल महिलाओं में जागरूकता और आत्मविश्वास का संचार किया, बल्कि नेतृत्व क्षमता के प्रति एक नई अलख भी जगाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण परिवेश से आई महिलाओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
आरक्षण और लोकतांत्रिक भागीदारी पर चर्चा

सम्मेलन का मुख्य केंद्र बिंदु संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण रहा। उपस्थित महिलाओं ने इस ऐतिहासिक कदम का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि नीति निर्धारण और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी बढ़ती भागीदारी राष्ट्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम स्थल पर बनाई गई 'हस्ताक्षर दीवार' पर महिलाओं ने उत्साहपूर्वक दस्तखत कर सशक्तीकरण के प्रति अपने संकल्प को साझा किया।
नेतृत्व से ही संभव है समग्र विकास

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लवली शर्मा ने अपने संबोधन में शिक्षा और स्वावलंबन पर जोर देते हुए कहा:
"समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिका में हों। शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता ही महिला सशक्तीकरण की असली आधारशिला हैं।"
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. साधना अग्रवाल, त्रिवेणी पटेल, माधुरी जंघेल, शीतल जैन, पुष्पा जंघेल, राजेश्री त्रिपाठी एवं वंदना टांडेकर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल प्रबंधन ज्योति जंघेल, उमा चौबे एवं गिरजा चंद्राकर के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
‘मेरी जुबानी, मेरी कहानी’ से झलका आत्मविश्वास

सत्र के दौरान महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से आए सकारात्मक बदलावों को 'मेरी जुबानी, मेरी कहानी' मंच के माध्यम से साझा किया। हितग्राहियों ने बताया कि इस योजना से मिली आर्थिक सहायता ने न केवल उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा किया है, बल्कि परिवार के भीतर उनके सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता में भी वृद्धि की है।
सांस्कृतिक छटा और जागरूकता का संगम

सम्मेलन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और किशोरी बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए समां बांध दिया। लोक गीतों और नाटकों के माध्यम से 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' तथा 'पोषण अभियान' जैसे गंभीर विषयों पर प्रभावी संदेश दिए गए।


