खैरागढ़. नगर पालिका परिषद खैरागढ़ में विकास कार्यों के नाम पर सामने आए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अविनाश देवांगन, उप अभियंता मुजफ्फर हुसैन तथा प्रभारी लेखापाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में तीनों को नियमों के विपरीत भुगतान और वित्तीय अनियमितता का प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने यह आदेश जारी किया है।
मामला वार्ड क्रमांक 6 में अधोसंरचना मद से स्वीकृत दो निर्माण कार्यों से जुड़ा है। पहला कार्य नरेश पांडे के घर से नाला तक आरसीसी नाली निर्माण का था, जिसकी स्वीकृत लागत 5.75 लाख रुपये थी। आरोप है कि मौके पर कार्य नहीं होने के बावजूद ठेकेदार को 3 मार्च 2026 को 5,24,453 रुपये का भुगतान कर दिया गया। दूसरा मामला केवरी रजक के घर से राधे देवांगन के घर तक सीसी रोड निर्माण का है, जिसकी स्वीकृत लागत 2.27 लाख रुपये थी, लेकिन कार्य पूर्ण होने से पहले ही निर्धारित राशि से अधिक भुगतान किए जाने का आरोप है।
इस पूरे मामले की शिकायत नगर पालिका अध्यक्ष गिरिजा नंद चंद्राकर ने संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बिना कार्य कराए भुगतान किया गया और सरकारी राशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। शिकायत के बाद विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया और प्रारंभिक जांच शुरू की।
नवा रायपुर अटल नगर से 10 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि नरेश पांडे के घर से नाला तक नवीन नाली निर्माण कार्य किए बिना ही माप पुस्तिका में प्रविष्टि कर भुगतान किया गया। वहीं सीसी रोड निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले ही भुगतान जारी कर दिया गया। जांच में इन कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत गंभीर कदाचार माना गया।
इसके आधार पर राज्य शासन ने तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अविनाश देवांगन, उप अभियंता मुजफ्फर हुसैन तथा प्रभारी लेखापाल को संबंधित सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान तीनों का मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर कथित फर्जी भुगतान के इस मामले में शासन की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब विभागीय जांच आगे बढ़ने के साथ संबंधित ठेकेदार की भूमिका, भुगतान प्रक्रिया और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी जांच के दायरे में आ सकती है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।


