खैरागढ़. छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले में पशु चिकित्सा सेवाओं की हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जालबांधा स्थित पशु चिकित्सालय खुद ही “बीमार” अवस्था में है, जहां इलाज व्यवस्था लगभग भगवान भरोसे चल रही है। नतीजतन, क्षेत्र के पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मवेशियों की जान पर बन आई है।
बंद औषधालय, ठप सेवाएं

जालबांधा पशु चिकित्सालय के अंतर्गत आने वाले बाजार अतरिया, डोकराभाठा और बिजलदेही के पशु औषधालय लंबे समय से बंद पड़े हैं। स्टाफ की भारी कमी के कारण इन केंद्रों में ताले लटके हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को दूर-दराज भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही।
ड्यूटी टाइम सिर्फ कागजों में

ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पदस्थ वेटनरी सर्जन डॉ. ममता रात्रे महीने में कभी-कभार ही अस्पताल पहुंचती हैं। अस्पताल का निर्धारित समय सुबह 7 से 11 बजे और शाम 5 से 6 बजे तक है, लेकिन यह समय सिर्फ कागजों में सीमित होकर रह गया है। नियमित उपस्थिति नहीं होने से पशुपालकों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।
मुख्यालय से दूरी बनी बड़ी समस्या
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि डॉक्टर मुख्यालय में निवास नहीं करतीं और 40-50 किलोमीटर दूर से आती हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में उनका समय पर उपलब्ध होना लगभग असंभव हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार गंभीर स्थिति में भी डॉक्टर का कोई अता-पता नहीं रहता।
मवेशियों की मौत से हड़कंप

हाल ही में जालबांधा के समीप पेटी गांव में एक सप्ताह के भीतर 15 से 20 मवेशियों की अचानक मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, बीमारी तेजी से फैल रही है और समय पर इलाज न मिलने के कारण पशुओं को बचा पाना मुश्किल हो रहा है। कई पशुपालकों की भैंसों की मौत से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
एक प्रभावित ग्रामीण ने बताया कि बीमारी की शुरुआत में वे कई दिनों तक पशु चिकित्सालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलीं। समय पर उपचार न मिलने से उनकी दो भैंसों की मौत हो गई। उन्होंने प्रशासन से लापरवाह चिकित्सक को हटाकर जिम्मेदार डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की है।
मीडिया में आने के बाद हरकत में विभाग
मामले के मीडिया में आने के बाद विभाग की टीम पेटी गांव पहुंची और जांच शुरू की गई। हालांकि, अब तक हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
मैदानी पड़ताल में खुली हकीकत
स्थिति की सच्चाई जानने के लिए हमारी टीम ने 28 अप्रैल मंगलवार को जालबांधा स्थित पशु चिकित्सालय का दौरा किया। टीम सुबह 7 बजे से 11 बजे तक अस्पताल परिसर में मौजूद रही और पदस्थ चिकित्सक का इंतजार करती रही, लेकिन निर्धारित समयावधि में वे नहीं पहुंचीं।
इस दौरान संपर्क करने पर संबंधित चिकित्सक ने बताया कि वे खैरागढ़ में एक बैठक में शामिल होने आई हैं। हालांकि, जब इस संबंध में खैरागढ़ में पदस्थ पशु चिकित्सक डॉ. विनय मिश्रा से जानकारी ली गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित डॉक्टर किसी भी निर्धारित बैठक में वहां उपस्थित नहीं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में वे स्वयं नियमित रूप से मौजूद रहते हैं।
इस विरोधाभासी स्थिति ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर संबंधित चिकित्सक किस बैठक का हवाला देकर अनुपस्थिति को उचित ठहरा रही थीं।
प्रशासन पर उठे सवाल
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिले के उच्च अधिकारियों की निगरानी और जवाबदेही पर उठ रहा है। क्या निचले स्तर के अधिकारी अब किसी नियंत्रण में नहीं हैं? लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
कार्रवाई का इंतजार
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
👉 अगले अंक में पढ़ें:
“पहले वैक्सीनेशन में टॉप… अब क्यों हुआ फ्लॉप?”


