खैरागढ़/छुईखदान. जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई (KCG) के वनांचल क्षेत्रों में सामाजिक बहिष्कार और अमानवीय प्रताड़ना का एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। 'छत्तीसगढ़ प्रांत कलार सिन्हा समाज' की मुख्यधारा में शामिल होने वाले लगभग 200 परिवारों को 'चंदनहा कलार समाज' के पदाधिकारियों द्वारा न केवल समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है, बल्कि उनसे अवैध वसूली और मानसिक उत्पीड़न भी किया जा रहा है। मंगलवार को जिला अध्यक्ष दीनदयाल सिन्हा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के पीड़ित लोगों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विवाद की जड़: मुख्यधारा में विलय

शिकायत के अनुसार, साल्हेवारा और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले चंदनहा कलार समाज के करीब 200 परिवारों ने साल 2023 में आपसी सहमति से 'छत्तीसगढ़ डडसेना कलार समाज' (पंजीयन क्र. 21596) में विलय कर लिया था। इस विलय का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, आर्थिक उत्थान और कुरीतियों (जैसे कबीलाई पद्धति के विवाह जिनसे संताने अस्वस्थ हो रही थीं) को समाप्त करना था। आरोप है कि इस विलय से चंदनहा समाज के पदाधिकारियों का वर्चस्व समाप्त हो गया, जिससे नाराज होकर उन्होंने पीड़ित परिवारों पर अत्याचार शुरू कर दिया।
पूनाराम की आपबीती: मौत पर भी भारी पड़ी गुटबाजी
इस पूरे विवाद में आवेदक पूनाराम सिन्हा की आपबीती सबसे अधिक हृदयविदारक है। जनवरी 2026 में जब पूनाराम के ससुर का निधन हुआ, तो समाज के ठेकेदारों ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोक दिया। तर्क दिया गया कि पूनाराम मुख्यधारा के समाज से जुड़े हैं। अंततः, अपने ससुर को अंतिम विदाई देने के बदले उनसे 3,000 रुपये का अवैध दंड वसूला गया। इतना ही नहीं, उन्हें दशगात्र कार्यक्रम से भी वंचित रखा गया और आज उनकी सगी बहनों तक से उनका संपर्क तोड़ दिया गया है।
इन आवेदकों ने खोला मोर्चा

पूनाराम के साथ-साथ भुनेश्वर सिन्हा, दुवासू सिन्हा और टूम्मन सिन्हा ने भी अपनी पीड़ा साझा की। भुनेश्वर सिन्हा पर ससुराल के कार्यक्रम में जाने के कारण 10,000 रुपये का जुर्माना थोपा गया है, वहीं दुवासू और टूम्मन सिन्हा से भी शुद्धिकरण के नाम पर हजारों रुपयों की मांग की जा रही है। इन सभी का कसूर सिर्फ इतना है कि इन्होंने बेहतर शिक्षा और कुरीतियों से मुक्ति के लिए साल 2023 में 'छत्तीसगढ़ कलार समाज' में विलय स्वीकार किया था।
दहशत में परिवार, प्रशासन से आस
जिलाध्यक्ष दीनदयाल सिन्हा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि अनावेदक पदाधिकारियों द्वारा पीड़ितों को मुंडन कराने, कान पकड़कर माफी मांगने और सामाजिक भोज देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 17 और 19 का उल्लंघन है।
पीड़ितों का कहना है कि छुईखदान थाने में पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन पुलिस की ढिलाई के कारण अनावेदकों के हौसले बुलंद हैं। अब पुलिस अधीक्षक व कलेक्टर से शिकायत के बाद पीड़ितों को उम्मीद है कि उन्हें अपनी ही बिरादरी में दोबारा सम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीने का हक मिलेगा।




