खैरागढ़. जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध खैरागढ़ के वनक्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग ने व्यापक अभियान शुरू किया है। बीते कुछ महीनों में वन्य प्राणियों के शिकार, प्राकृतिक मौतों और भीषण गर्मी के कारण पक्षियों एवं वन्यजीवों की बढ़ती मृत्यु की घटनाओं ने विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद वन विभाग ने जंगलों में निगरानी और संरक्षण गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।


खैरागढ़ के घने जंगल लंबे समय से तेंदुआ, भालू समेत कई दुर्लभ वन्य प्राणियों और पक्षियों का प्राकृतिक आवास रहे हैं। हरियाली और समृद्ध जैव विविधता से भरपूर यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए विशेष महत्व रखता है। हालांकि हाल के दिनों में वन्यजीवों के शिकार और प्राकृतिक कारणों से हुई मौतों की घटनाओं ने इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से चिंतन की आवश्यकता पैदा की है।

मुख्य वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत ने बताया कि वन विभाग द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी अभियान संचालित किया जा रहा है। जंगलों में नियमित रूप से रात्रिकालीन गश्त की जा रही है, वहीं शिकार के उद्देश्य से लगाए गए फंदों और अन्य अवैध उपकरणों को लगातार जब्त किया जा रहा है। विभागीय अमला संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।


वन्यजीवों की गतिविधियों पर वैज्ञानिक तरीके से नजर रखने के लिए जंगलों में ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं। इन कैमरों के माध्यम से वन्य प्राणियों की आवाजाही, उनके व्यवहार और संभावित खतरों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे संरक्षण संबंधी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
गर्मी के मौसम में जल संकट से वन्यजीवों को बचाने के लिए विभाग ने जंगलों में जल स्रोतों का संरक्षण और अतिरिक्त जल व्यवस्था भी सुनिश्चित की है। कई स्थानों पर कृत्रिम जलाशय और पेयजल की व्यवस्था की गई है ताकि वन्यजीवों को पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर न जाना पड़े।
वन विभाग का कहना है कि संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना भी उनकी प्राथमिकता है। विभाग की इन पहलों को जिले की प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह सतत निगरानी और संरक्षण कार्य जारी रहे तो क्षेत्र के वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इस प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित रखा जा सकेगा।





