खैरागढ़. छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी अंबेडकर चौक में एकत्रित हुए, जहां से उन्होंने पैदल रैली निकालते हुए नारेबाजी की और कलेक्टर कार्यालय तक मार्च किया।

रैली के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर फेडरेशन के जिला अध्यक्ष प्रखर शरण सिंह की अगुवाई में कर्मचारियों और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
लंबे समय से लंबित मांगों पर बढ़ा असंतोष
फेडरेशन ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि प्रदेश के कर्मचारियों को “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादों का अब तक लाभ नहीं मिल पाया है। जुलाई 2016 से लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स, समयमान वेतनमान, अवकाश नगदीकरण सहित कई मुद्दों पर शासन द्वारा ठोस निर्णय नहीं लिए जाने से कर्मचारियों में व्यापक नाराजगी है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इन मांगों को लेकर पहले भी वर्ष 2025 में कई बार शासन-प्रशासन को पत्राचार और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ये हैं प्रमुख 11 मांगें
फेडरेशन ने अपनी प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ता एरियर्स को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, 8, 16, 24 और 32 वर्ष में चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने, तथा मध्यप्रदेश की तर्ज पर 300 दिन अर्जित अवकाश नगदीकरण की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी है।
इसके अलावा पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर वेतन विसंगतियां दूर करने, शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ देने, सहायक शिक्षकों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को समयमान वेतनमान देने की मांग भी प्रमुख रूप से शामिल है।
अनुकंपा नियुक्ति को निःशर्त लागू करने, 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त करने, पंचायत सचिवों के शासकीयकरण, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन एवं पदोन्नति देने, तथा संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी उठाई गई है।
सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और नई भर्तियों की मांग
कर्मचारियों ने विभागों में रिक्त पदों और स्टाफ की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग रखी है। साथ ही आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली समाप्त करने और सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है। विभागों में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की अनुमति देने की मांग भी ज्ञापन में की गई है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
फेडरेशन के जिला अध्यक्ष प्रखर शरण सिंह ने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई है और यदि शासन द्वारा जल्द ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि फेडरेशन से जुड़े 132 संगठनों के कर्मचारी इस आंदोलन में एकजुट हैं और आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

