रायपुर. इस बार छत्तीसगढ़ में होली का रंग कुछ अलग नजर आ सकता है। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति के तहत होली के दिन भी शराब दुकानों को खुला रखने का फैसला किया गया है। सरकार का दावा है कि यह निर्णय अवैध शराब बिक्री और कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इस कदम ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस को जन्म दे दिया है।
नई आबकारी नीति में शराब निषेध (ड्राई डे) की सूची में अहम बदलाव किया गया है। अब प्रदेश में केवल 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) और 18 दिसंबर (गुरु घासीदास जयंती) को ही शराब दुकानें बंद रहेंगी। इसके विपरीत होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी पुण्यतिथि) को निषेध सूची से हटा दिया गया है। यही संशोधन विवाद का केंद्र बन गया है।
सरकार और आबकारी विभाग का तर्क है कि होली जैसे बड़े त्योहारों पर शराब की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। ऐसे में दुकानें बंद रखने से अवैध बिक्री और कालाबाजारी को बढ़ावा मिलता है। अधिकृत दुकानों को खुला रखने से न केवल इन गतिविधियों पर नियंत्रण संभव होगा, बल्कि राजस्व में वृद्धि भी होगी।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि त्योहारों पर शराब की आसान उपलब्धता से कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और सामाजिक माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। होली के दौरान पहले से ही भीड़ और उत्साह रहता है, ऐसे में नशे से जुड़ी घटनाओं और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
गौरतलब है कि इससे पहले 30 जनवरी को शराब दुकानें खुली रखने को लेकर भी राज्य में व्यापक विरोध देखा गया था। अब होली को लेकर लिया गया यह निर्णय एक बार फिर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था, सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगा।

