खैरागढ़. राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा को सितार वादन के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट साधना और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिल्ली आकाशवाणी ने देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित 'टॉप ग्रेड आर्टिस्ट' सम्मान से अलंकृत किया है। इस उपलब्धि के साथ वह आगरा की पहली कलाकार बन गई हैं, जिन्हें आकाशवाणी का यह सर्वोच्च ग्रेड प्राप्त हुआ है। इस सम्मान के बाद आगरा सहित खैरागढ़ विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल है और उन्हें विभिन्न क्षेत्रों से बधाइयां मिल रही हैं।
प्रो. लवली शर्मा इससे पहले देश की प्रथम डी.लिट. सितार वादिका के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी हैं। संगीत शिक्षा, शोध, मंचीय प्रस्तुति और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता रहा है।
राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर में कुलपति रहते हुए उन्होंने संगीत शिक्षा को नई दिशा देने के साथ शोध और समाजसेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने संगीत विषय पर 13 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। जेलों में बंद बंदियों के बीच संगीत के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन का अभियान चलाया तथा म्यूजिक थेरेपी के जरिए मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रभावी पहल की। भारतीय संगीत परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए उनका कार्य निरंतर जारी रहा।
राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का दायित्व संभालने के बाद प्रो. शर्मा ने विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रशासनिक पारदर्शिता और सांस्कृतिक नवाचार की नई पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय 'ए ग्रेड' की दिशा में तेजी से अग्रसर हुआ। शिक्षा, प्रशासन, संस्कृति, अधोसंरचना और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल की गईं।
विश्वविद्यालय परिसर में जैविक कचरे से कम्पोस्ट खाद निर्माण, वॉटर हार्वेस्टिंग, भवनों का जीर्णोद्धार और नवीन निर्माण कराया गया। पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी एवं त्वरित बनाया गया, समयबद्ध परीक्षा परिणाम सुनिश्चित किए गए तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। देश के प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा विद्यार्थियों के लिए नियमित विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था भी शुरू की गई।
प्रो. शर्मा के कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने कई राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू कर शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत किया। विश्वविद्यालय के चार विद्यार्थियों का चयन ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति के लिए हुआ। वर्षों से बंद पड़े ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर और राजमहल के प्रथम तल को भी पुनः जनोपयोगी बनाया गया।
सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार के तहत 'श्रुति मंडल', मासिक लोककला कार्यक्रम, निःशुल्क ग्रीष्मकालीन कला शिविर, जनजातीय गौरव राष्ट्रीय संगोष्ठी, रघुनाथ चौधरी की कांस्य प्रतिमा निर्माण, नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य व्याख्यान, भातखंडे-पलुस्कर स्मृति समारोह, पुस्तक मेला, गोद लिए गए गांवों में कला शिक्षा, एनएसएस गतिविधियां तथा तीन वर्षों बाद खैरागढ़ महोत्सव का सफल आयोजन कराया गया, जिसने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दी।
खेल और युवा गतिविधियों में भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की। सेंट्रल जोन युवा उत्सव में विश्वविद्यालय ने ओवरऑल तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि राष्ट्रीय अंतर विश्वविद्यालय युवा उत्सव में भी विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों के लिए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से निःशुल्क कैंटीन, पहली बार विश्वविद्यालय का वार्षिक कैलेंडर, योग संध्या, डॉ. भीमराव आंबेडकर विषयक चित्रकला प्रतियोगिता, चार वर्षों से लंबित 17वें दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन, भारतीय भाषा परिवार राष्ट्रीय सम्मेलन, नाट्य महोत्सव, पुरालिपि एवं पुरालेख कार्यशाला तथा महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के अखंड घुंघरू नाद जैसे अभिनव कार्यक्रम भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां रहे।
विदेशी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर 32 तक पहुंचाई गई। कथक एवं लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। अधोसंरचना विकास के अंतर्गत 55 सीटर वातानुकूलित बस, नई एम्बुलेंस की स्वीकृति, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया तथा विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित कर 'राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय' किए जाने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी इसी कार्यकाल में हासिल हुईं।
आकाशवाणी द्वारा प्रदान किया गया 'टॉप ग्रेड आर्टिस्ट' सम्मान प्रो. लवली शर्मा की दशकों की संगीत साधना, शिक्षा, शोध, सामाजिक प्रतिबद्धता और विश्वविद्यालय में किए गए व्यापक नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक स्वीकृति माना जा रहा है। यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, आगरा और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का विषय बन गया है।


