राजनांदगांव. महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली मां बमलेश्वरी फेडरेशन की अध्यक्ष और पद्मश्री सम्मानित फुलबासन बाई यादव के अपहरण की सनसनीखेज कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस की तत्परता और चेकिंग अभियान के चलते यह वारदात टल गई। इस मामले में दो महिलाओं सहित कुल चार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे सुकुलदैहान स्थित निवास पर एक युवती स्कॉर्पियो वाहन से पहुंची। उसने फुलबासन बाई से कहा कि वाहन में एक दिव्यांग लड़की बैठी है, जो उनकी बड़ी प्रशंसक है और उनके साथ फोटो खिंचवाना चाहती है। युवती ने यह भी कहा कि वह गाड़ी से उतरने की स्थिति में नहीं है, इसलिए वे कुछ कदम चलकर वाहन तक आ जाएं।
विश्वास में आकर जैसे ही फुलबासन बाई वाहन के पास पहुंचीं और भीतर बैठीं, पहले से मौजूद दो पुरुषों ने उन्हें जबरन अंदर खींच लिया। विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया कि “आज तुम्हारा केक काटने वाला है, जिसकी सूचना राजनांदगांव तक पहुंच जाएगी।”

इसी दौरान वाहन शहर के चिखली पुलिस चौकी के पास गठुला नाला चेकिंग पॉइंट से गुजर रहा था, जहां सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पुलिस ने गाड़ी रोकी। चालानी कार्रवाई के दौरान वाहन में मौजूद आरोपियों ने स्थिति को छिपाने की कोशिश की। बताया गया कि बेमेतरा के बिमोरी निवासी खुशबू साहू ने उनका मुंह दबाकर शांत रहने को कहा और झूठ बोला कि उनकी “दीदी को मिर्गी का दौरा पड़ा है।”
लेकिन फुलबासन बाई ने साहस दिखाते हुए दरवाजे पर पैर मारकर पुलिस को संकेत दिया। सतर्क जवानों ने स्थिति भांपते हुए उन्हें वाहन से बाहर निकाला और पहचान कर सुरक्षित बचा लिया।
घटना के बाद भावुक हुईं फुलबासन बाई ने बताया कि मुख्य आरोपी खुशबू साहू पहले से उनके संपर्क में थी और खुद को उनके जैसा बनाना चाहती थी। दो दिन पहले भी वह उन्हें किसी कार्यक्रम में ले जाने की जिद कर चुकी थी, जिसे उन्होंने मना कर दिया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरोपी बिहान (आजीविका मिशन) को लेकर भी नाराजगी जाहिर कर रही थी और इसी बहाने से साजिश रची गई।

घटना के बाद फुलबासन बाई सुकुलदैहान पुलिस चौकी पहुंचीं, जहां वे महापौर मधुसूदन यादव के सामने भावुक हो गईं। महापौर ने उनकी बात विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से फोन पर कराई, जिन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने बताया कि खुशबू साहू सुनियोजित तरीके से वाहन लेकर पहुंची थी और उसके साथ तीन अन्य लोग भी थे। प्रथम दृष्टया जबरन वाहन में बैठाकर ले जाने की पुष्टि हुई है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि वे उन्हें कहां और किस उद्देश्य से ले जा रहे थे।
इस घटना ने प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, समय पर पुलिस की सक्रियता ने एक बड़ी वारदात को टाल दिया।


