रायपुर. छत्तीसगढ़ के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है। शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में इस बार आईपीएल का रोमांच नए कलेवर में दिखने वाला है, लेकिन 'फ्री पास' की उम्मीद लगाए बैठे रसूखदारों को तगड़ा झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक, इस सीजन में रायपुर में होने वाले मैचों के लिए टिकट वितरण की व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। मेजबान टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने इस बार टिकटों का नियंत्रण अपने हाथ में रखने का फैसला किया है।
मंत्री-विधायकों के समर्थकों की उम्मीदें पस्त
अमूमन बड़े आयोजनों में मंत्री, विधायकों और प्रभावशाली नेताओं के समर्थकों के बीच 'फ्री पास' के लिए होड़ मची रहती है। लेकिन इस बार आरसीबी फ्रेंचाइजी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी प्रकार की 'कॉम्प्लीमेंट्री' या फ्री पास संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। फ्रेंचाइजी खुद करीब 65 हजार टिकट सीधे बाजार में बेचेगी, ताकि अधिक से अधिक प्रशंसकों को मैच देखने का मौका मिल सके और पारदर्शिता बनी रहे।
CSCS की भूमिका होगी सीमित
चर्चा है कि इस बार आयोजन में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) की भूमिका केवल तकनीकी और स्थानीय स्तर पर सहयोग तक ही सीमित रह सकती है। पहले की तुलना में इस बार टिकटों के कोटे और उनके वितरण में संघ का हस्तक्षेप न के बराबर रहने की संभावना है। सूत्र बताते हैं कि फ्रेंचाइजी ने सुरक्षा और सुचारू संचालन के लिए प्रोफेशनल एजेंसियों को प्राथमिकता देने का मन बनाया है।
रायपुर बनेगा RCB का 'दूसरा किला'
आईपीएल 2026 के शेड्यूल के अनुसार, बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के साथ-साथ रायपुर को आरसीबी का 'सेकंड होम' बनाया गया है। आरसीबी यहां अपने दो महत्वपूर्ण मुकाबले खेलेगी, जिसमें पहला मैच ही रायपुर के मैदान पर धमाकेदार शुरुआत करेगा।
"मैनेजमेंट का मानना है कि टिकट वितरण को सीधे अपने हाथ में लेने से पारदर्शिता बढ़ेगी और असली क्रिकेट प्रेमियों को स्टैंड्स तक पहुँचने में आसानी होगी।" — सूत्र
प्रशंसकों के लिए क्या है खास?
ऑनलाइन बिक्री: टिकटों की बड़ी खेप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: पिछली घटनाओं को देखते हुए इस बार भीड़ प्रबंधन और एंट्री गेट्स पर विशेष तकनीक का इस्तेमाल होगा।
विराट-क्रेज: रायपुर में विराट कोहली की दीवानगी को देखते हुए स्टेडियम के हाउसफुल रहने की शत-प्रतिशत उम्मीद है।
इस फैसले से जहाँ आम दर्शक खुश हैं कि उन्हें अपनी मेहनत की कमाई से टिकट मिलने की गारंटी मिलेगी, वहीं 'पास' की राजनीति करने वाले स्थानीय नेताओं के खेमे में मायूसी छाई है।



