खैरागढ़. प्रदेश सरकार के ‘सुशासन तिहार’ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। जिला पंचायत सदस्य निर्मला विजय वर्मा ने मुख्यमंत्री द्वारा एक वर्ष पूर्व किए गए घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए इसे “सिर्फ दिखावा और प्रचार” करार दिया है।
वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष ग्राम पंचायत झुरानदी में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान गांव में संचालित हायर सेकंडरी स्कूल के लिए नए भवन की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई थी। उन्होंने स्वयं भी इस मांग को रखा था, जिस पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी। लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद स्कूल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्कूल की पढ़ाई अतिरिक्त कमरों में संचालित हो रही है, जहां छात्रों की संख्या अधिक होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इससे विद्यार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्मा ने पेयजल समस्या को लेकर भी सरकार और प्रशासन को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बेलगांव, भदेरा और मगरकुंठ जैसे गांवों में पानी टंकियां तो बना दी गईं, लेकिन वे जर्जर हालत में हैं और आज तक उपयोग में नहीं लाई जा सकीं। ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, जबकि अधिकारियों द्वारा सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं।
उन्होंने ‘जल जीवन मिशन’ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह योजना ज़मीनी स्तर पर लागू होने के बजाय कागजों तक सीमित रह गई है। वर्मा के अनुसार, पिछले साल सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीणों द्वारा दिए गए कई आवेदनों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुशासन के नाम पर केवल प्रचार-प्रसार में संसाधन खर्च कर रही है, जबकि जमीनी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। इस मामले में प्रशासन की चुप्पी और धीमी कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।
अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या लंबित घोषणाओं पर अमल तेज किया जाता है या नहीं।


