खैरागढ़. छत्तीसगढ़ सरकार के ताजा बजट पर पूर्व सांसद प्रतिनिधि व पूर्व विधायक प्रतिनिधि कपिनाथ महोबिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “अज्ञान, दुर्गति और विनाश का बजट” करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह निराशाजनक दस्तावेज है, जिसमें आम जनता, किसानों, युवाओं और कमजोर वर्गों के लिए ठोस प्रावधान नहीं हैं।
महोबिया ने कहा कि वित्त मंत्री ने लगभग पौने दो घंटे का भाषण दिया, लेकिन बजट में जमीनी मुद्दों का समाधान नजर नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार धान उत्पादन और रकबा बढ़ने के बावजूद खरीदी कम कर दी गई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए बजट में कोई नई ठोस योजना नहीं है। युवाओं और रोजगार सृजन को लेकर भी स्पष्ट रोडमैप का अभाव है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान का हवाला देते हुए कहा कि “हर साल बजट में बड़े-बड़े दावे होते हैं, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन नहीं दिखता।”
महोबिया ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष संसदीय परंपराओं की अनदेखी कर रहा है और राज्यपाल के अभिभाषण के बाद अपेक्षित चर्चा भी नहीं हुई। उन्होंने रेल कॉरिडोर को “कॉरपोरेट हाउस के हितों से जुड़ा” बताते हुए इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले को लेकर उन्होंने कहा कि नए जिले के विकास के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में स्पष्ट योजना का अभाव है। जिले में बांस की प्रचुरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बांस का अधिक मात्रा में उत्पादन होने के कारण बांस आधारित कागज उद्योग स्थापित कर युवाओं को रोजगार दिया जा सकता था, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रही है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। गैस सिलेंडर जैसी घोषणाएं भी तीसरे बजट में पूरी नहीं हो सकीं।
महोबिया ने निष्कर्षतः कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि निराशा और भ्रम का दस्तावेज है, जिसने खासकर खैरागढ़ जिले की जनता की उम्मीदों को झटका दिया है।


