चेन्नई में चमका खैरागढ़: राष्ट्रीय युवा उत्सव में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को मिली बड़ी सफलता
खैरागढ़. छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले खैरागढ़ स्थित इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। चेन्नई के सत्यभामा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित 39वें राष्ट्रीय अंतर-विश्वविद्यालय युवा उत्सव में विश्वविद्यालय के दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई शीर्ष पुरस्कार अपने नाम किए।
अखिल भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश भर के सैकड़ों विश्वविद्यालयों के बीच खैरागढ़ के छात्रों ने संगीत, नृत्य और ललित कलाओं में अपनी छाप छोड़ी।
समूह गान में प्रथम, संगीत और नृत्य में भी लहराया परचम
विश्वविद्यालय के दल ने इस उत्सव में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। सबसे बड़ी उपलब्धि समूह गान (Group Song) में मिली, जहाँ विश्वविद्यालय के दल ने प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता।
अन्य व्यक्तिगत श्रेणियों में भी प्रदर्शन सराहनीय रहा:
सुगम संगीत: शगुन पाठक ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
शास्त्रीय नृत्य: साराक्षी सक्सेना ने द्वितीय स्थान हासिल किया।
शास्त्रीय वाद्य वादन (वायलिन): धात्री संत ने तृतीय स्थान पाया।
कोलाज कला: ललित कला संकाय के गुलशन साहू ने तृतीय स्थान पर कब्जा जमाया।
शास्त्रीय गायन व पेंटिंग: प्रिया कुमारी (शास्त्रीय गायन) और कानन खंडेलवाल (स्पॉट पेंटिंग) ने पंचम स्थान प्राप्त कर अपनी विधाओं में शीर्ष पांच में जगह बनाई।
इन कलाकारों ने बढ़ाया मान
प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की ओर से प्रथा रामटेके, मोनिका निराला, प्रिया कुमारी, प्रियांशु पाण्डेय, शगुन पाठक, निखिल आनंद, साराक्षी सक्सेना, गुलशन साहू, कानन खंडेलवाल एवं धात्री संत ने मुख्य प्रतिभागी के रूप में शिरकत की।
कलाकारों की प्रस्तुति में वाद्य संगत का विशेष योगदान रहा, जिसमें रामचन्द्र सर्पे, शफीक हुसैन, दीपक दास मंहत, रोशन कुमार, मौलश्री सिंह, फिजाम महेन्द्र सिंह, आर्यन मन्होत्रा और बी. शरत शामिल थे। दल का कुशल नेतृत्व सहायक प्राध्यापक कपिल सिंह वर्मा और अतिथि व्याख्याता डॉ. गुंजन तिवारी ने किया।
कुलपति ने दी बधाई: "यह निरंतर साधना का परिणाम"
सफलता का परचम लहराकर वापस लौटे विद्यार्थियों ने कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा से भेंट कर जीत का श्रेय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और मार्गदर्शन को दिया।
"हमारे विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर जो उपलब्धि हासिल की है, वह उनकी कड़ी मेहनत और गुरुओं के मार्गदर्शन का सुखद परिणाम है। कला की साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती।"
— प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा, कुलपति
कुलपति ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता संगीत संकाय प्रो. नमन दत्त, डॉ. मानस साहू और छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. देवमाईत मिंज सहित अन्य प्राध्यापक उपस्थित रहे।

