राजनांदगांव. मेहनत, आत्मविश्वास और लगन के दम पर बड़ी सफलता हासिल करने वाली संस्कारधानी राजनांदगांव की बेटी श्रद्धा हरिहरनो ने एक नया मुकाम हासिल करते हुए दुर्ग मिरर फैशन वीक 3.0 का खिताब अपने नाम कर लिया है। महज 17 वर्ष की उम्र में ‘मिस दुर्ग’ बनने वाली श्रद्धा आज नई पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं।
नंदई चौक, राजनांदगांव निवासी धनंजय हरिहरनो और ज्योति हरिहरनो की पुत्री श्रद्धा ने दुर्ग में आयोजित प्रतिष्ठित दुर्ग मिरर फैशन वीक 3.0 प्रतियोगिता में दर्जनों प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। प्रतियोगिता का आयोजन मिरर फैशन एकेडमिक के संचालक आशीष चंद्राकर और परी चंद्राकर द्वारा किया गया था। इस जीत के साथ श्रद्धा ने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे राजनांदगांव जिले का नाम भी गौरवान्वित किया है।

श्रद्धा की यह सफलता अचानक नहीं आई है। इससे पहले वर्ष 2025 में राजनांदगांव में आयोजित मॉडलिंग शो ‘प्रिंस एंड प्रिंसेस’ में वह फर्स्ट रनर-अप रह चुकी हैं। लगातार खुद को बेहतर बनाने और मंच पर अपनी प्रतिभा को निखारने के प्रयासों का ही परिणाम है कि उन्होंने अब ‘मिस दुर्ग’ जैसा प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया।
अपनी सफलता का श्रेय श्रद्धा ने अपने माता-पिता को दिया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का विश्वास और प्रोत्साहन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। श्रद्धा का मानना है कि वर्तमान समय में बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और अवसर मिलने पर वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
उन्होंने युवतियों और छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी और शिद्दत से मेहनत करनी चाहिए। कमियों से घबराने के बजाय उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेल्फ ग्रूमिंग, नियमित एक्सरसाइज और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी है। साथ ही माता-पिता की उम्मीदों और विश्वास पर खरा उतरना भी हर बेटी की जिम्मेदारी है।
श्रद्धा ने कहा कि जो चीजें नहीं आतीं, उन्हें सीखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि निरंतर सीखने और मेहनत से ही प्रतिभा निखरती है और व्यक्ति की वास्तविक पहचान बनती है। उन्होंने बताया कि उनका सपना केवल एक सफल मॉडल बनना ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य करना है।
इस उपलब्धि के पीछे उनकी मां ज्योति हरिहरनो की विशेष भूमिका रही है, जो नगर के प्रतिष्ठित बचपन प्ले स्कूल में ऑफिस इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। अपनी मेहनत, सादगी और कार्यकुशलता के कारण वे संस्था में काफी लोकप्रिय हैं। वहीं उनके पिता धनंजय हरिहरनो एक सफल व्यवसायी हैं और उन्होंने भी बेटी को हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वर्तमान में कक्षा 12वीं (वाणिज्य) की छात्रा श्रद्धा हरिहरनो ने बेहद कम उम्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह न केवल राजनांदगांव बल्कि पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए यह संदेश है कि सपनों की उड़ान उम्र नहीं, बल्कि हौसले और मेहनत तय करते हैं। उनकी सफलता आज हजारों युवतियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और बड़े सपने देखने की प्रेरणा दे रही है।


