खैरागढ़. शहर के अमलीपारा स्थित मंडी परिसर में बना खैरागढ़ का सबसे पुराना मुक्ति धाम आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। वर्षों से यह स्थल शहर के लगभग 8 से 10 वार्डों के लोगों के लिए अंतिम संस्कार का प्रमुख स्थान बना हुआ है, लेकिन यहां आने वाले शोकाकुल परिवारों और नागरिकों के लिए पर्याप्त व्यवस्था आज तक विकसित नहीं हो सकी है।
अमलीपारा, सोनेसरार, किल्लापारा, इतवारी बाजार, बख्शी मार्ग, तुरकारीपारा, सोनारपारा और ठाकुरपारा सहित आसपास के कई वार्डों के लोग अपने परिजनों की अंतिम विदाई देने इसी मुक्ति धाम में पहुंचते हैं। इसके बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है।
विशेषकर बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थल पर न तो पर्याप्त टीन शेड की व्यवस्था है और न ही लोगों के बैठने के लिए उचित स्थान उपलब्ध है। वर्तमान में जो टीन शेड लगा हुआ है, वह भी नगर की सिंधी पंचायत द्वारा जनहित में लगाया गया है, जिससे नागरिकों को आंशिक राहत मिल रही है।
इस बीच पिछले करीब पांच वर्षों से मुक्ति धाम परिसर की साफ-सफाई और हरियाली बनाए रखने की जिम्मेदारी स्थानीय सामाजिक संस्था श्री राम गौ सेवा समिति के स्वयंसेवक निभा रहे हैं। समिति के सेवाभावी सदस्य गोविंद सोनी, राजू यादव, संजय वालेच, चंदन गोस्वामी और निखिल तिवारी प्रतिदिन सुबह समय निकालकर परिसर में लगे पौधों को पानी देते हैं और स्वच्छता बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं।
समिति के सदस्यों का कहना है कि यह स्थान शहर के लोगों की अंतिम यात्रा का पड़ाव है, इसलिए इसे स्वच्छ और व्यवस्थित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने नगरवासियों से भी अपील की है कि वे इस स्थल की महत्ता को समझते हुए यहां स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।
नगर के नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि शहर के इस ऐतिहासिक और प्रमुख मुक्ति धाम में जल्द से जल्द आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। लोगों का कहना है कि यहां टीन शेड, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्षों से उपयोग में आ रहे इस मुक्ति धाम के विकास के लिए प्रशासन को गंभीरता से पहल करनी चाहिए, ताकि शोक की घड़ी में आने वाले परिवारों को कम से कम बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।




