खैरागढ़. वनांचल क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के साल्हेवारा क्षेत्र से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। ग्राम सरईपतेरा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र पिछले दो माह से बंद पड़ा है। केंद्र में ताला लटकने के कारण ग्रामीणों को सामान्य उपचार के लिए भी करीब 12 किलोमीटर दूर साल्हेवारा जाना पड़ रहा है। स्थायी चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारियों की पदस्थापना नहीं होने से ग्रामीणों को उप स्वास्थ्य केंद्र का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्राम सरपंच बनस लाल साहू ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र के शुरुआती दिनों में व्यवस्था ठीक थी, लेकिन स्थायी चिकित्सक या स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से स्वास्थ्यकर्मियों का आना-जाना लगा रहा। करीब तीन माह पहले व्यवस्था के तौर पर एक स्टाफ नर्स की पदस्थापना की गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें भी हटा दिया गया। इसके बाद से केंद्र बंद है। स्वास्थ्य विभाग से कई बार स्थायी चिकित्सक या कर्मचारी की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई।

ग्राम सरपंच बनस लाल साहू ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र के शुरुआती दिनों में व्यवस्था ठीक थी, लेकिन स्थायी चिकित्सक या स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से स्वास्थ्यकर्मियों का आना-जाना लगा रहा। करीब तीन माह पहले व्यवस्था के तौर पर एक स्टाफ नर्स की पदस्थापना की गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें भी हटा दिया गया। इसके बाद से केंद्र बंद है। स्वास्थ्य विभाग से कई बार स्थायी चिकित्सक या कर्मचारी की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र खुलने से उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्तमान में स्थिति पहले जैसी हो गई है। छोटी-मोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी 12 किलोमीटर दूर साल्हेवारा जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों की परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि विभाग उप स्वास्थ्य केंद्र का संचालन नहीं कर सकता तो इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए, ताकि लोगों को कम से कम झूठी उम्मीद न रहे।
विधायक ने सीएमएचओ को दिए निर्देश

इस मामले में विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा ने भाजपा सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिले के कई उप स्वास्थ्य केंद्रों में या तो स्टाफ की कमी है या फिर दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्वास्थ्य केंद्र या उप स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों और दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए। जीवनदीप समिति की बैठक में भी उन्होंने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। सरईपतेरा उप स्वास्थ्य केंद्र को भी जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया से होगी स्टाफ की पूर्ति

वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल शुक्ला ने बताया कि ग्राम सरईपतेरा उप स्वास्थ्य केंद्र में अब तक किसी स्थायी कर्मचारी की पदस्थापना नहीं हुई थी। डीएमएफ फंड से एक एनएम कर्मचारी को वहां रखा गया था, लेकिन उम्र अधिक होने के कारण जीवनदीप समिति ने उन्हें हटा दिया। वर्तमान में जिले में सीएचओ और एनएम की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके माध्यम से जल्द ही सरईपतेरा उप स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की व्यवस्था की जाएगी।
दावों और हकीकत के बीच इंतजार
फिलहाल सरईपतेरा के ग्रामीणों को उप स्वास्थ्य केंद्र दोबारा शुरू होने का इंतजार है। विधायक ने जल्द केंद्र खुलवाने का भरोसा दिया है, वहीं सीएमएचओ ने भर्ती प्रक्रिया के बाद स्टाफ की पूर्ति का आश्वासन दिया है। अब सवाल यह है कि इन आश्वासनों को अमलीजामा कब पहनाया जाएगा और वनांचल के ग्रामीणों को अपने ही गांव में स्वास्थ्य सुविधा कब नसीब होगी? फिलहाल उप स्वास्थ्य केंद्र पर लटका ताला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।




