खैरागढ़. राजकुमारी इंदिरा सिंह कला एवं संगीत विश्वविद्यालय में वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर संस्थान की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने वाले चार कर्मचारियों को अधिवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर भावभीनी विदाई दी गई। विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ एवं कर्मचारी कल्याण संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शाल, श्रीफल, मोमेंटो, सम्मान पत्र एवं उपहार भेंटकर सम्मानित किया गया। इस दौरान माहौल भावुक हो गया और विश्वविद्यालय परिवार ने उनके योगदान को याद करते हुए आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
सेवानिवृत्त होने वालों में कार्यालय अधीक्षक चंद्रप्रकाश गायकवाड़, सहायक ग्रेड-1 लक्ष्मी सिंह, सहायक ग्रेड-2 विभाष मालवीय एवं ग्रंथालय सहायक ज्योति रानी झा शामिल हैं। इनमें चंद्रप्रकाश गायकवाड़ ने 43 वर्ष 9 माह, लक्ष्मी सिंह ने 40 वर्ष 3 माह, विभाष मालवीय ने 29 वर्ष 8 माह तथा ज्योति रानी झा ने 11 वर्ष 2 माह तक विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दीं।
43 वर्ष से अधिक का सेवाकाल, चंद्रप्रकाश गायकवाड़ का रहा उल्लेखनीय योगदान
चंद्रप्रकाश गायकवाड़ ने 21 जनवरी 1983 को विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं प्रारंभ की थीं। 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने तक उन्होंने संबद्धता, छात्रवृत्ति, विदेशी छात्रवृत्ति, विजिटिंग फेलो, कुलसचिव के निज सचिव, परीक्षा विभाग एवं स्थापना विभाग सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। कार्यालय अधीक्षक के रूप में उन्होंने स्थापना विभाग, परीक्षा विभाग और कुलपति सचिवालय में प्रभारी का दायित्व भी संभाला। उनका 43 वर्ष 9 माह का लंबा सेवाकाल विश्वविद्यालय के प्रति समर्पण और कार्यनिष्ठा का उदाहरण रहा।
40 वर्ष तक प्रशासनिक व्यवस्था में निभाई अहम भूमिका
लक्ष्मी सिंह ने 28 मार्च 1986 को अंग्रेजी टाइपिस्ट के रूप में विश्वविद्यालय में अपनी सेवा शुरू की थी। सेवाकाल के दौरान उन्होंने सामान्य प्रशासन, परीक्षा, लेखा एवं ग्रंथालय विभाग में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हुईं लक्ष्मी सिंह ने कुल 40 वर्ष 3 माह तक संस्थान को अपनी सेवाएं दीं।
ग्रंथालय और सामान्य प्रशासन में दिया योगदान
विभाष मालवीय ने 30 जनवरी 1997 को विश्वविद्यालय में नियुक्ति प्राप्त की थी। उन्होंने ग्रंथालय एवं सामान्य प्रशासन विभाग में कार्य करते हुए 29 वर्ष 8 माह तक अपनी सेवाएं दीं। वे 30 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। वहीं ज्योति रानी झा ने 14 अगस्त 2015 को विश्वविद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया था। ग्रंथालय सहायक के रूप में उन्होंने पुस्तकालय की व्यवस्थाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाई। 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हुईं झा का सेवाकाल 11 वर्ष 2 माह रहा।
कुलपति सहित अधिकारियों ने किया सम्मान, योगदान को सराहा
समारोह में कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा, कुलसचिव वेंकट रमण गुड़े, सहायक कुलसचिव विजय सिंह, वित्त अधिकारी हर्षल चंद्रवंशी एवं संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. आशुतोष चौरे सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी उपस्थित रहे। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रखर शरण सिंह, सचिव जे.एन. साटिया, कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष राजू सिंह कश्यप एवं सचिव कन्हैया यादव ने भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संस्थान की प्रगति में कर्मचारियों की मेहनत, अनुभव और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चारों कर्मचारियों ने अपने लंबे सेवाकाल में अलग-अलग विभागों में जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया। उनके अनुभव और सेवाभाव को विश्वविद्यालय परिवार हमेशा याद रखेगा। सभी ने उनके स्वस्थ, सुखी एवं खुशहाल जीवन की कामना की।
सेवाकाल के अनुभव साझा कर जताया आभार
समारोह में चारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भी अपने सेवाकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से मिले सहयोग, स्नेह और सम्मान के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान आलोक सिंह, नरेश सिंह ठाकुर, मनीष कुलकर्णी, राजेंद्र सिंह, संतोष श्रीवास, नवीन महोबे, सौरभ चौहान, शलभ मिश्रा, संध्या रघु, निधि सिंह, रिचा तिवारी, कौशल जैन, दाऊलाल चंद्रवंशी, दीपक जतेरे, भुवनेश्वर गेंड्रे, महेंद्र नेताम, रामकुमार यादव, समारु राम, उमाशंकर यादव, संजय चंद्राकर, प्रकाश ठाकुर, बी.आर. रत्नाकर, लता निषाद, ऋषभनील सिंह, प्रतीक टहनगुरिया, हिमांशु यादव, सचिन पटेल एवं महोबिया सहित विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन जे.एन. साटिया ने किया।




