खैरागढ़. छत्तीसगढ़ में वर्ष 2027 की जनगणना के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण) के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविर अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। तहसील खैरागढ़ के केंद्रीय विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण के पहले ही दिन प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ भीषण गर्मी के बीच प्रशिक्षण लेने आए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को न केवल भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, बल्कि उन्हें जानवरों की तरह प्लास्टिक की बाल्टियों में खाना परोसा गया।
सम्मान के बजाय मिला तिरस्कार

मिली जानकारी के अनुसार, जनगणना निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के तहत प्रत्येक प्रशिक्षु के भोजन और जलपान के लिए 200 रुपये प्रति व्यक्ति की राशि आवंटित की गई है। इसके बावजूद, गुरुवार को खैरागढ़ के प्रशिक्षण केंद्र में मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आईं। प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें भोजन करने के लिए डिस्पोजल या स्टील की प्लेट तक मुहैया नहीं कराई गई। भोजन परोसने के लिए साफ बर्तनों के बजाय गंदी प्लास्टिक की बाल्टियों का उपयोग किया गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

इस बदइंतजामी से आक्रोशित प्रशिक्षुओं ने मौके पर ही हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही साफ नजर आ रही है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि एक ओर सरकार डिजिटल जनगणना और तकनीकी प्रशिक्षण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन कर्मियों को बुनियादी सुविधाएं और सम्मान तक नहीं दिया जा रहा है, जिन पर इस राष्ट्रीय कार्य की जिम्मेदारी है।
"हम शासन के निर्देश पर राष्ट्र सेवा के लिए यहाँ आए हैं। 42 डिग्री की धूप में प्रशिक्षण लेने के बाद जब भोजन की बारी आई, तो हमें भेड़-बकरियों की तरह बाल्टियों में खाना दिया गया। यह हमारे आत्मसम्मान पर चोट है।"
— एक आक्रोशित प्रगणक
कार्रवाई के घेरे में जिम्मेदार
15 अप्रैल से 24 अप्रैल तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में तहसील खैरागढ़ के प्रथम बैच का यह हाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सूत्रों के अनुसार, उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है और संबंधित वेंडर व जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।




