खैरागढ़. खैरागढ़ जिले की राजनीति में पूर्व विधायक कोमल जंघेल से जुड़ा विवाद अब सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहराता जा रहा है। कथित यौन शोषण से जुड़ी खबरों के सामने आने के बाद जहां राजनीतिक माहौल गरमाया, वहीं अब किसान संगठनों और लोधी समाज के खुलकर सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर सवाल और किसान संगठन का खंडन

हाल के दिनों में कई मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह खबर प्रसारित हुई थी कि जिले में चल रहे किसान आंदोलन से जुड़ी एक महिला नेत्री ने पूर्व विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि किसान अधिकार संघर्ष समिति ने तत्काल विज्ञप्ति जारी कर साफ किया कि उनके आंदोलन से जुड़ी किसी भी महिला द्वारा ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। स्वयं कोमल जंघेल भी कह चुके हैं कि उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से साजिश रचकर उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
लोधी समाज का प्रदर्शन और कार्रवाई की मांग

सोमवार को जिला लोधी समाज बड़ी संख्या में प्रशासन के समक्ष पहुंचा और विरोध दर्ज कराया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने कहा कि न तो किसी पुलिस थाने में और न ही किसी अन्य स्तर पर कोमल जंघेल के नाम से कोई शिकायत दर्ज हुई है। उनके अनुसार यह पूरा घटनाक्रम उन्हें बदनाम करने की साजिश है। समाज ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर सात दिनों के भीतर उन मीडिया माध्यमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की, जिनमें कथित रूप से झूठी खबरें प्रकाशित हुई हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा और संबंधित मीडिया संस्थानों के विरुद्ध मानहानि का दावा भी दायर किया जाएगा।
मामला पहुंचा उच्च स्तर तक, पुलिस की चुप्पी पर सवाल

ज्ञापन की प्रतिलिपि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, गृह मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पुलिस महानिदेशक और जिला कलेक्टर को भी भेजी गई है। दो बार विधायक रह चुके और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा से जुड़े कोमल जंघेल से जुड़ा यह विवाद अब राजनीतिक महत्व भी हासिल कर चुका है। ऐसे में पुलिस प्रशासन की अब तक की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या जांच शुरू हो चुकी है या नहीं — इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। लोधी समाज के प्रदर्शन ने संकेत दे दिए हैं कि यह मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही इसके सियासी असर की दिशा तय करेगी।


