नई दिल्ली. देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। नई दरों के अनुसार आज से पेट्रोल ₹108.86 प्रति लीटर और डीजल ₹102.11 प्रति लीटर हो गया है। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच किसानों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव साफ दिखाई देने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। देश के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में सिंचाई पंप, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि उपकरण डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे समय में जब किसान पहले से ही खाद, डीएपी, यूरिया, बीज और मजदूरी की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं, ईंधन की नई बढ़ोतरी खेती की लागत को और बढ़ा सकती है। खरीफ सीजन की तैयारी के बीच यह फैसला किसानों के लिए अतिरिक्त चुनौती माना जा रहा है।
परिवहन क्षेत्र पर भी इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। ट्रक ऑपरेटरों और माल परिवहन से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, जिसका असर धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देगा। सब्जियां, फल, दूध, अनाज, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने पर आखिरकार उसका भार उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, ईंधन मूल्य वृद्धि का प्रभाव केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे बाजार तंत्र को प्रभावित करता है। सार्वजनिक परिवहन किराए, निजी वाहन संचालन, ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं और छोटे कारोबार भी इससे प्रभावित होते हैं। ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतें महंगाई को नई रफ्तार दे सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और मजदूर वर्ग के बीच इस बढ़ोतरी को लेकर चिंता का माहौल है। कई किसानों का कहना है कि फसल उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। ऐसे में ईंधन के दाम बढ़ना आर्थिक संतुलन को और कठिन बना रहा है।
वहीं आम उपभोक्ताओं के बीच भी बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता गहराती जा रही है। घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव के बीच लोगों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का असर अब हर घर के मासिक खर्च में महसूस होने लगा है।


