दुर्ग. जिले के धमधा थाना क्षेत्र में नाबालिग युवती के लापता होने का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवती के बरामद होने के बाद भी पुलिस ने कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले नाबालिग युवती के लापता होने पर परिजनों ने धमधा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 173 के तहत मामला दर्ज कर युवती की तलाश शुरू की। कुछ दिनों बाद युवती एक युवक के साथ मिली।
यहीं से मामला विवादों में आ गया। परिजनों का आरोप है कि युवक के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें यह कहकर मामला समाप्त करने के लिए कहा कि कार्रवाई आगे बढ़ने से लड़की की बदनामी होगी। परिवार का आरोप है कि बरामदगी के बाद भी युवती को दोबारा उसी युवक के साथ भेज दिया गया, जहां वह चार दिन तक रही। विरोध के बाद पुलिस ने युवती को वापस बुलाकर परिजनों को सौंपा।
इन आरोपों के बाद कई गंभीर कानूनी सवाल सामने आ रहे हैं। यदि युवती नाबालिग थी, तो क्या उसका तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया गया? क्या उसे नियमानुसार बाल कल्याण समिति अथवा सक्षम न्यायिक प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया? आरोपी युवक के विरुद्ध किन धाराओं में कार्रवाई की गई? क्या मामले में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम लागू करने की आवश्यकता थी? इन सभी बिंदुओं पर अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने कहा है कि यदि जांच में किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं धमधा थाना प्रभारी महेंद्र कुमार ध्रुव ने बताया कि वे अवकाश पर हैं और मामले का विवेचना कार्य एएसआई राजेंद्र बघेल कर रहे हैं।
यह मामला अब केवल एक गुमशुदगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में कानून के पालन को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है। वहीं यदि जांच में आरोप निराधार साबित होते हैं, तो पुलिस को भी तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का इंतजार है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि परिजनों के आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर कानून के पालन में चूक हुई है।


