गंडई. महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पोषण माह के अंतर्गत ग्राम ढाबा में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती एवं शिशुवती माताओं, बच्चों तथा ग्रामीणों को पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बाल विकास और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की उपसंचालक प्रियंका ठाकुर ने आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार, स्वच्छता, केंद्र की व्यवस्थाओं और बच्चों के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से विभागीय योजनाओं एवं हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी लेते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उपसंचालक ठाकुर ने गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाले पोषण आहार का नियमित लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद माताओं के लिए पर्याप्त एवं संतुलित पोषण बेहद जरूरी है। नियमित पोषण आहार से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और माताओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने पालकों से बच्चों के खान-पान, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुपोषण की रोकथाम के लिए परिवार, समुदाय और विभाग के बीच समन्वय एवं सहभागिता आवश्यक है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में जनसहयोग बढ़ाने की अपील
कार्यक्रम में परियोजना अधिकारी सुनील बंजारे ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्ययोजना, विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल विकास से संबंधित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे समुदाय की सहभागिता का केंद्र बनें। इसके लिए ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से आवश्यकता के अनुसार स्थानीय स्तर पर जनसहयोग उपलब्ध कराने की अपील की। साथ ही बच्चों के लिए उपयोगी खिलौने एवं शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने, केंद्र परिसर की स्वच्छता बनाए रखने और बच्चों के लिए बेहतर एवं आनंदपूर्ण वातावरण तैयार करने में सहयोग का आह्वान किया।
श्री बंजारे ने कहा कि समाज के छोटे-छोटे सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा के लिए विभागीय प्रयासों के साथ जनभागीदारी जुड़ना जरूरी है। उन्होंने लोगों से आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में सहयोग करने की अपील की।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान, बालिकाओं को मिली स्वच्छता किट
कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। गांव और समुदाय स्तर पर बच्चों तथा महिलाओं तक विभागीय सेवाएं पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों को ‘विकसित भारत के कप्तान’ पुस्तिका का वितरण भी किया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता धर्मशिला नेताम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समर्पित गीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति से कार्यक्रम में उत्साह एवं आत्मीयता का माहौल बना, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
वहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बालिकाओं को स्वच्छता किट वितरित की गई। बालिकाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व की जानकारी देते हुए नियमित रूप से स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
खेल और गतिविधियों से बच्चों को सीखने का संदेश
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता की। माताओं एवं पालकों को बच्चों के साथ संवाद, खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बालिका शिक्षा और प्रारंभिक बाल विकास के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की उपसंचालक प्रियंका ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी पी.आर. खुटेल, परियोजना अधिकारी सुनील बंजारे, पर्यवेक्षक पूजा वर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रूपेश्वरी एवं धर्मशिला नेताम, मंडल अध्यक्ष राकेश ठाकुर, महिला मोर्चा अध्यक्ष उमा चौबे, मंडल महामंत्री अंजलि सहित गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बालिका शिक्षा एवं आंगनबाड़ी सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के विकास में जनसहयोग और जनभागीदारी बढ़ाने का रहा।


