खैरागढ़. आर्थिक तंगी के कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए, इसकी मिसाल राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में देखने को मिली। मध्य प्रदेश के मंडला जिले की छात्रा नम्रता परते की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने प्रवेश में आ रही बाधा दूर की। निर्धारित समय पर प्रवेश शुल्क जमा नहीं कर पाने के कारण छात्रा पर 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क लग रहा था। कुलपति ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए विलंब शुल्क माफ कर दिया, वहीं विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ ने छात्रा का प्रवेश शुल्क अदा कर सहयोग किया। इस पहल से नम्रता का बीपीए तृतीय वर्ष गायन में दाखिला सुनिश्चित हो सका और उनकी पढ़ाई जारी रखने का रास्ता खुल गया।
आर्थिक तंगी से समय पर नहीं जमा कर पाईं शुल्क
मंडला निवासी नम्रता परते, पिता कुंवर सिंह परते, विश्वविद्यालय में बीपीए गायन की छात्रा हैं। उन्होंने प्रथम और द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पूरी कर परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। तृतीय वर्ष में प्रवेश लेने की इच्छा के बावजूद परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वह निर्धारित समय पर प्रवेश शुल्क जमा नहीं कर सकीं। प्रवेश की अंतिम तिथि निकलने के बाद उनकी परेशानी और बढ़ गई। नियमित प्रवेश शुल्क जमा करने की इच्छा के बावजूद प्रतिदिन 100 रुपये के हिसाब से लगने वाला विलंब शुल्क उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया था।
कुलपति ने माफ किया विलंब शुल्क
छात्रा की समस्या सामने आने पर कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने तत्काल पहल की। उन्होंने विशेष अनुमति प्रदान करते हुए विलंब शुल्क माफ कराया और निर्धारित तिथि समाप्त होने के बाद भी प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने का रास्ता बनाया। कुलपति के इस निर्णय से आर्थिक कठिनाई के कारण छात्रा की पढ़ाई रुकने की आशंका दूर हुई। विश्वविद्यालय में इसे विद्यार्थियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए संवेदनशील निर्णय लेने की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
गैर शिक्षक कर्मचारी संघ ने उठाया प्रवेश शुल्क का जिम्मा

नम्रता ने आर्थिक परेशानी के चलते विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ से भी मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर सहयोग राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। छात्रा की स्थिति को देखते हुए संघ ने उनका प्रवेश शुल्क अदा कर सहयोग किया। इस तरह कुलपति द्वारा विलंब शुल्क माफ किए जाने और गैर शिक्षक कर्मचारी संघ द्वारा प्रवेश शुल्क जमा किए जाने से नम्रता का बीपीए तृतीय वर्ष गायन में प्रवेश पूरा हो सका।
संवेदनशीलता और सहयोग से बचा शिक्षा का अवसर
नम्रता प्रथम और द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण कर अपनी पढ़ाई के प्रति प्रतिबद्धता साबित कर चुकी हैं। आर्थिक संकट के कारण उनकी शिक्षा बीच में न रुके, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और गैर शिक्षक कर्मचारी संघ की पहल महत्वपूर्ण साबित हुई। कुलपति का निर्णय और संघ का आर्थिक सहयोग यह संदेश देता है कि शैक्षणिक संस्थानों में नियमों के साथ विद्यार्थियों की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। समय पर मिली मदद ने नम्रता को संगीत की पढ़ाई जारी रखने का नया अवसर दिया है।


