दीपावली की खुशियां छोड़ कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीण, बायोगैस प्लांट के विरोध में फूटा आक्रोश
बिना ग्राम पंचायत प्रस्ताव के परियोजना को सहमति देने का आरोप, सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठाए सवाल; एसडीएम ने दीपावली बाद उचित पहल का दिया भरोसा
खैरागढ़. दीपावली के पर्व पर जहां घरों में दीप जल रहे थे और लोग परिवार के साथ त्योहार की खुशियां मनाने की तैयारी में जुटे थे, वहीं नवागांव कंवर और आसपास के ग्रामीण अपने गांव के भविष्य से जुड़े मुद्दे को लेकर कलेक्टोरेट पहुंच गए। प्रस्तावित बायोगैस प्लांट के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश इस कदर था कि उन्होंने त्योहार की तैयारियों से ज्यादा जरूरी अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाना समझा। ग्रामीणों ने परियोजना के लिए ग्राम पंचायत की ओर से दी गई कथित सहमति पर सवाल उठाते हुए सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए तथा प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में बायोगैस प्लांट स्थापना को लेकर विधिवत प्रस्ताव पारित नहीं किया गया और न ही गांव के लोगों की सहमति ली गई। इसके बावजूद सरपंच और सचिव ने पंचायत की सहमति दर्शाते हुए परियोजना के पक्ष में प्रस्ताव तैयार कर दिया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब ग्रामसभा अथवा पंचायत में इस संबंध में कोई विधिवत सहमति नहीं बनी, तो आखिर किस आधार पर पंचायत की ओर से परियोजना को मंजूरी देने की बात सामने आई? इसी कथित अनियमितता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
विरोध की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार के दिन भी ग्रामीण अपनी मांग लेकर कलेक्टोरेट पहुंच गए। हालांकि दीपावली के चलते कार्यालय बंद था, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत सुनने के लिए खैरागढ़ एसडीएम अविनाश ठाकुर मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर उनका आवेदन प्राप्त किया और दीपावली के बाद संबंधित पक्षों से बातचीत कर मामले में उचित पहल करने का भरोसा दिलाया। एसडीएम के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना विरोध स्थगित कर दिया।
अब पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। ग्रामीणों के आरोपों के बीच यह जांच का विषय है कि क्या बायोगैस परियोजना के लिए पंचायत की सहमति निर्धारित प्रक्रिया के तहत ली गई थी? क्या प्रस्ताव पारित करने से पहले ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच विधिवत चर्चा हुई थी? यदि ग्रामीणों की सहमति नहीं ली गई, तो पंचायत की ओर से सहमति दर्शाने वाले प्रस्ताव का आधार क्या था? फिलहाल ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। दीपावली के दिन कलेक्टोरेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की यह घटना बताती है कि ग्रामीण इस परियोजना को लेकर कितने गंभीर और नाराज हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन जांच कर ग्रामीणों की आपत्तियों का निराकरण करता है या मामला महज आश्वासन तक सीमित रह जाता है।




