खैरागढ़. जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र कुमार देवांगन की कार्यशैली और शिक्षकों के प्रति व्यवहार को लेकर उठे विवाद के बीच गुरुवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के सदस्यों और डीईओ के बीच सार्थक चर्चा हुई। चर्चा के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने पूर्व में जारी निर्देशों में संशोधन करते हुए प्राचार्य वचन पत्र को रद्द करने, एक्शन प्लान की बाध्यता समाप्त करने और होम टाइम टेबल को वैकल्पिक रखने का निर्णय लिया है। वहीं, शनिवार 24 अक्टूबर से हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के संचालन समय में भी बदलाव किया गया है।
चर्चा के बाद बदले निर्देश, वचन पत्र रद्द
शिक्षकों और प्राचार्यों से वचन पत्र भरवाने को लेकर उठे विवाद के बाद डीईओ ने स्पष्ट किया कि 9 अक्टूबर 2026 को आयोजित त्रैमासिक परीक्षा समीक्षा बैठक में प्राचार्यों ने समय पर विभागीय जानकारी उपलब्ध कराने का मौखिक आश्वासन दिया था। इसी आधार पर लिखित प्राचार्य वचन पत्र को रद्द कर दिया गया है। अब इसे लागू नहीं किया जाएगा।
एक्शन प्लान लागू करने की बाध्यता खत्म
डीईओ ने स्पष्ट किया है कि 99 बिंदुओं वाले एक्शन प्लान को लागू करना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, इसमें शामिल ऐसे बिंदुओं को विद्यालय, विद्यार्थियों और परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए उपयोगी मानने पर संस्था प्रमुख स्वेच्छा से अपना सकते हैं। डीईओ ने कहा कि एक्शन प्लान के 30 प्रतिशत बिंदुओं का भी प्रभावी पालन विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है। उन्होंने प्राचार्यों से समय निकालकर एक्शन प्लान पढ़ने की अपील भी की है।
बच्चों की सहमति से बनेगा होम टाइम टेबल
होम टाइम टेबल को लेकर भी निर्देशों में बदलाव किया गया है। अब संस्था प्रमुख अपने विद्यालय के विद्यार्थियों की सहमति के आधार पर इसे लागू करने के लिए स्वतंत्र होंगे। यह व्यवस्था अनिवार्य नहीं रहेगी। विद्यालय के लिए उपयोगी लगने पर ही संस्था प्रमुख इसे अपना सकेंगे।
शनिवार से सुबह 7:30 से 11:30 बजे तक लगेंगे स्कूल
शाला संचालन संबंधी नए निर्देशों के अनुसार, शनिवार 24 अक्टूबर से वे हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल, जो सामान्यतः सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते थे, अब सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक संचालित होंगे।
दो पालियों में संचालित विद्यालयों में शनिवार को पालियों की अदला-बदली की जाएगी। अर्थात सुबह की पाली दिन में और दिन की पाली सुबह संचालित होगी। हालांकि, विद्यालय में पर्याप्त कमरे और स्थान उपलब्ध होने तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी की अनुमति मिलने पर दोनों पालियों के स्थान पर एक ही समय में विद्यालय संचालन किया जा सकेगा।
निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निरीक्षण के दौरान पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं होने के बावजूद केवल सुबह विद्यालय लगाने के उद्देश्य से एक समय में संचालन किया जाना पाया गया, तो संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संस्था प्रमुख और संकुल समन्वयक जिम्मेदार होंगे। शासन से इस संबंध में आदेश प्राप्त होने की प्रत्याशा में फिलहाल ये निर्देश जारी किए गए हैं।
कक्षा में कुर्सी पर बैठकर पूरे समय नहीं पढ़ा सकेंगे शिक्षक
नए निर्देशों में कक्षा अध्यापन को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। संस्था प्रमुख कक्षा में कुर्सी रख सकेंगे, लेकिन शिक्षकों को इस तरह अध्यापन करना होगा कि अंतिम विद्यार्थी तक उनकी पहुंच लगातार बनी रहे। शिक्षक समय-समय पर कुर्सी का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन पूरे 40 मिनट केवल कुर्सी पर बैठकर पढ़ाने से बचना होगा, क्योंकि इससे बच्चों पर उचित संदेश नहीं जाएगा। हालांकि, दिव्यांग शिक्षक और मातृत्व अवस्था में रहने वाली शिक्षिकाओं को इस निर्देश से छूट दी गई है।
विवाद के बाद निर्देशों में संशोधन
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने इससे पहले जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली और शिक्षकों के प्रति व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। संगठन ने वरिष्ठ शिक्षकों, प्राचार्यों और व्याख्याताओं को सार्वजनिक रूप से सवालों के जरिए अपमानित करने, कार्यालयीन समय के बाद बैठक लेने तथा एक्शन प्लान और प्राचार्य वचन पत्र लागू करने के लिए दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए थे। फेडरेशन ने कार्यशैली में सुधार नहीं होने पर जिला से प्रदेश स्तर तक आंदोलन की चेतावनी भी दी थी।
अब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हुई चर्चा के बाद कई निर्देशों में संशोधन किया गया है। प्राचार्य वचन पत्र रद्द होने, एक्शन प्लान की बाध्यता समाप्त होने और होम टाइम टेबल को वैकल्पिक किए जाने से विभागीय निर्देशों को लेकर उठे विवाद में महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है।


