खैरागढ़. नगर दशहरा उत्सव समिति द्वारा राजा फतेह सिंह खेल मैदान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध जस सम्राट दिलीप षड़ंगी ने अपनी सुमधुर जस गीतों और छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि हजारों दर्शक देर रात तक झूमते रहे। रात करीब 2 बजे तक चले कार्यक्रम में गीत-संगीत का ऐसा रंग जमा कि कहीं दर्शक थिरकते नजर आए तो कहीं तालियों की गड़गड़ाहट से मैदान गूंज उठा।


कार्यक्रम में पहुंचने पर भाजपा नेताओं ने फूल-मालाओं से दिलीप षड़ंगी का आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद वे अपने खास अंदाज में दर्शकों के बीच से होते हुए मंच तक पहुंचे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि हर प्रस्तुति पर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता गया।


दिलीप षड़ंगी ने ‘पाताल चटनी’, ‘आमा पान के पतरी’, ‘कोरी-कोरी नरियर’ और ‘चंदवा बैगा’ जैसे जस गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को भक्तिरस में सराबोर किया। वहीं, दर्शकों की फरमाइश पर ‘पान वाला बाबू’ और ‘फूलमती’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। जस गीतों से लेकर छत्तीसगढ़ी गीतों तक उनकी प्रस्तुतियों ने देर रात तक लोगों को बांधे रखा। नगर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग अपने पसंदीदा कलाकार को सुनने पहुंचे थे।
‘खैरागढ़ का मुझ पर बहुत बड़ा ऋण’

प्रस्तुति के दौरान दिलीप षड़ंगी ने खैरागढ़ से अपने विशेष जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे राजकुमारी इंदिरा सिंह कला एवं संगीत विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी के सदस्य रह चुके हैं। इसी विश्वविद्यालय से उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की गई है। उन्होंने कहा, “खैरागढ़ का मुझ पर बहुत बड़ा ऋण है और मैं खुशकिस्मत हूं कि आज संगीत की नगरी खैरागढ़ आने का अवसर मिला।” उनके इस संबोधन ने खैरागढ़ के प्रति उनके आत्मीय रिश्ते को भी सामने रखा।
जनप्रतिनिधियों सहित हजारों लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं नगर दशहरा उत्सव समिति के संरक्षक विक्रांत सिंह, पूर्व जिला पंचायत सभापति घम्मन साहू, नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा नंद चंद्राकर, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेन्द्र त्रिपाठी, आलोक श्रीवास, शशांक ताम्रकार और जिला भाजयुमो अध्यक्ष आयश सिंह, ऋषभ सिंह, अनीश सिंह सहित समस्त पार्षद, भाजपा नेता तथा क्षेत्र के हजारों लोग उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में जस गीतों और छत्तीसगढ़ी संगीत की धुनों पर पूरा मैदान उत्साह और उल्लास से सराबोर रहा।


