खैरागढ़. विकासखंड छुईखदान के सुदूर वनांचल ग्राम निजामडीह में प्रशासनिक संवेदनशीलता और सामाजिक एकजुटता की एक अनुकरणीय मिसाल सामने आई है। मां को खोने के बाद असहाय हुई सात मासूम बेटियों के जीवन में अब जिला प्रशासन और समाज ने मिलकर सहारा दिया है, जिससे उनके भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।

करीब तीन माह पूर्व अमर सिंह मेरावी की पत्नी का ब्रेन ट्यूमर के कारण निधन हो गया, जिसके बाद 7 माह से 14 वर्ष आयु वर्ग की सातों बेटियां मातृ स्नेह से वंचित हो गईं। पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, लेकिन रोज़गार की मजबूरी के चलते बच्चियों की देखरेख में कठिनाई आ रही थी। इस संवेदनशील स्थिति की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया।

इसी कड़ी में सहायक आयुक्त (आदिवासी विभाग) स्वर्णिम शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत छुईखदान केश्वरी देवांगन सहित महिला एवं बाल विकास विभाग जिला अधिकारी पी. आर. ख़ुटेल और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने ग्राम निजामडीह पहुंचकर बच्चियों एवं उनके पिता से मुलाकात की, उनकी आवश्यकताओं का आकलन किया तथा उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। इस दौरान बच्चियों को स्कूल बैग, टिफिन, फल, नवीन वस्त्र, चप्पल, राशन सामग्री एवं दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री वितरित की गई। साथ ही अधिकारियों द्वारा एक-एक बच्ची की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य एवं समुचित देखभाल की जिम्मेदारी लेने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

इस पहल से गांव में भावुक माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करते हुए इसे मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
निजामडीह की यह पहल यह संदेश देती है कि जब प्रशासन और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तो विपरीत परिस्थितियों में भी आशा की नई राह बनाई जा सकती है।


