खैरागढ़, साकेत श्रीवास्तव. मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक पेट्रोलियम संकट की आहट अब स्थानीय रसोईघरों तक पहुँचने लगी है। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में पिछले कुछ दिनों से घरेलू गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

जहाँ एक ओर जिला प्रशासन जिले में गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों के ठीक उलट है। गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे उपभोक्ता अब थक-हारकर दोबारा पारंपरिक चूल्हों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।
सर्वर का 'पेंच' और उपभोक्ताओं की बढ़ती मुसीबत
शहर की गैस एजेंसियों में हमारे संवाददाता द्वारा की गई पड़ताल में सामने आया कि संकट केवल आपूर्ति का नहीं, बल्कि तकनीकी बाधाओं का भी है।

ग्राम टेकापार कला निवासी राजेश मोहीले ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया, "घर के दोनों सिलेंडर खाली हो चुके हैं। पिछले तीन दिनों से एजेंसी के चक्कर काट रहा हूँ, लेकिन हर बार कर्मचारी 'सर्वर डाउन' होने का हवाला देकर लौटा देते हैं।"

ऐसी ही स्थिति ग्राम पाण्डुका के उपभोक्ता नकुल राम वर्मा की है। उन्होंने बताया कि सिलेंडर न मिलने के कारण अब खाना बनाने के लिए पुराने पारंपरिक तरीकों (लकड़ी के चूल्हे) पर निर्भर होना पड़ रहा है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पोर्टल का सर्वर चालू नहीं होता, वे डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते।
आज दोपहर 3 बजे होगी निर्णायक बैठक
सप्लाई और सर्वर की इस दोहरी मार से आम जनता को राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन अब हरकत में आया है। आज दोपहर 3 बजे कलेक्टर कार्यालय में गैस कंपनियों के फील्ड ऑफिसर्स और जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है।
बैठक के मुख्य एजेंडे:
सर्वर की समस्या: कंपनियों से तकनीकी खराबी को तत्काल दुरुस्त करने की मांग।
सप्लाई चेन: मिडिल ईस्ट संकट के बीच जिले में बफर स्टॉक की स्थिति सुनिश्चित करना।
वितरण प्रणाली: पेंडिंग बुकिंग को प्राथमिकता के आधार पर क्लियर करना।
प्रशासनिक दावे बनाम जमीनी हकीकत

हालाँकि, जिला प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट किया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को 'पैनिक बुकिंग' करने की जरूरत नहीं है, लेकिन धरातल पर उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ रहा है। कर्मचारियों द्वारा सर्वर बंद होने की बात कहे जाने से पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: > हमारे संवाददाता ने जब गैस एजेंसी का जायजा लिया, तो वहां उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी गईं। कई दिनों के इंतजार के बाद भी सिलेंडर न मिलने से लोगों में भारी निराशा है। यदि आज की बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
अब सबकी निगाहें दोपहर 3 बजे होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। क्या प्रशासन सर्वर की इस गुत्थी को सुलझा पाएगा या खैरागढ़ की गृहिणियों को अभी और कुछ दिन धुएं के बीच चूल्हे पर खाना बनाना होगा?


