खैरागढ़. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रहने वाली खैरागढ़ नगर पालिका में एक बार फिर सरकारी धन की खुली लूट का मामला सामने आया है। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 6 में विकास कार्यों के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर न केवल 'हवा' में भुगतान किया गया, बल्कि स्वीकृत बजट से अधिक राशि भी बंदरबांट कर ली गई। नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा नंद चंद्राकर की लिखित शिकायत के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।
भ्रष्टाचार का लेखा-जोखा: नाली गायब, चेक जारी

अध्यक्ष द्वारा संयुक्त संचालक को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, वार्ड क्रमांक 6 में अधोसंरचना मद से दो प्रमुख कार्यों के लिए बजट आवंटित किया गया था। लेकिन 'हक इंटरप्राइजेस' नामक फर्म और विभागीय अधिकारियों की जुगलबंदी ने सरकारी खजाने को सेंध लगा दी:
शून्य निर्माण पर पूर्ण भुगतान: नरेश पांडेय के घर से नाला तक आरसीसी नाली निर्माण के लिए ₹5.75 लाख स्वीकृत थे। हैरानी की बात यह है कि मौके पर एक ईंट भी नहीं रखी गई, फिर भी 3 मार्च 2026 को ₹5,24,453 का भुगतान चेक क्रमांक 645197 के जरिए कर दिया गया।
स्वीकृति से अधिक मेहरबानी: इसी वार्ड में सी.सी. रोड के लिए ₹2.27 लाख की अनुदान स्वीकृति थी, लेकिन ठेकेदार को ₹2,45,139 का भुगतान कर दिया गया। यह न केवल वित्तीय अनियमितता है बल्कि सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत

शिकायत के केंद्र में तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) अविनाश देवांगन, उप अभियंता मुजफ्फर हुसैन और प्रभारी लेखापाल नीरज सिंह हैं। आरोप है कि इन तीनों ने आपसी सांठगांठ कर फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया। साक्ष्यों के अनुसार, सी.सी. रोड का काम 12 मार्च को शुरू हुआ, जबकि भुगतान 9 दिन पहले ही (3 मार्च को) शत-प्रतिशत कर दिया गया था। यह मामला प्रमाणित करता है कि भुगतान प्रक्रिया में 'इंजीनियरिंग' से ज्यादा 'सांठगांठ' प्रभावी थी।
प्रशासनिक हलचल: मौके पर पंचनामा तैयार

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास (क्षेत्रीय कार्यालय, दुर्ग) के निर्देश पर उप अभियंता सीबी परघनिया और श्री पांडे ने शुक्रवार को प्रभावित वार्ड का सघन दौरा किया। जांच टीम ने पाया कि मौके पर कार्य और कागजी दावों में जमीन-आसमान का अंतर है। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से भी पूछताछ की और पंचनामा तैयार किया।
अध्यक्ष की दोटूक: "वसूली और जेल, दोनों जरूरी"
नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा नंद चंद्राकर ने कहा, "यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित डकैती है। जब हमें पता चला कि बिना काम भुगतान हो गया है, तब ठेकेदार ने आनन-फानन में 12 मार्च को काम शुरू करने का दिखावा किया। हमने दोषियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई और फर्म से राशि की शत-प्रतिशत वसूली की मांग की है।"
आगे की कार्रवाई
नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदार पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है। वर्तमान में तत्कालीन CMO अविनाश देवांगन गंडई नगर पंचायत में पदस्थ हैं, उन पर भी विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक गई है।


