खैरागढ़. पशु चिकित्सा विभाग में नियमों को दरकिनार कर किए गए संलग्नीकरण (अटैचमेंट) का मामला शिकायत के बाद सुर्खियों में आ गया है। राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे की अनुशंसा पर जारी संलग्नीकरण आदेश को विभाग ने अब निरस्त कर दिया है। शिकायतकर्ता मंदीप सिंह ने इस मामले में जिला कलेक्टर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) से शिकायत कर शासन के नियमों के उल्लंघन और ग्रामीण पशुपालकों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया था। शिकायत के बाद उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, राजनांदगांव ने 8 अक्टूबर 2026 को निरस्तीकरण आदेश जारी कर संबंधित कर्मचारी को उसके मूल पदस्थापना स्थल पशु औषधालय देवरी में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।

सांसद के पत्र के 24 घंटे के भीतर जारी हुआ था आदेश
शिकायतकर्ता मंदीप सिंह के अनुसार, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे ने 9 जुलाई 2025 को पत्र क्रमांक 1490/सांसद कार्य/स्था./2025 जारी किया था। इसके ठीक अगले दिन, 10 जुलाई 2025 को उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, राजनांदगांव ने आदेश क्रमांक 1613 जारी कर पशु औषधालय देवरी, विकासखंड खैरागढ़ में पदस्थ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) श्रीमती कंचन कौर राजपूत को जिला कार्यालय राजनांदगांव में संलग्न कर दिया था।
शिकायत में इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि शासन द्वारा शासकीय कर्मचारियों के संलग्नीकरण पर प्रतिबंध के बावजूद महज 24 घंटे के भीतर जनप्रतिनिधि की अनुशंसा पर आदेश जारी किया गया। शिकायतकर्ता ने इसे प्रशासनिक विवेक के दुरुपयोग का मामला बताते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 और 20 के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
देवरी के पशुपालकों को हो रही थी परेशानी
मंदीप सिंह ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में कहा था कि श्रीमती कंचन कौर राजपूत के देवरी से जिला कार्यालय में संलग्न होने के कारण देवरी और आसपास के गांवों के पशुपालकों को पशु चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। संबंधित पशु औषधालय का प्रभार दूसरे कर्मचारी को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपे जाने से स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
शिकायतकर्ता ने नियम विरुद्ध जारी संलग्नीकरण आदेश को तत्काल निरस्त करने के साथ ही इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी।
8 अक्टूबर को जारी हुआ निरस्तीकरण आदेश
शिकायत और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद विभाग ने पूर्व संलग्नीकरण आदेश वापस ले लिया। उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, राजनांदगांव डॉ. अनूप चटर्जी ने आदेश क्रमांक 2539/स्थापना/2026, दिनांक 8 अक्टूबर 2026 जारी कर पूर्व में जारी संलग्नीकरण आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
आदेश के अनुसार, श्रीमती कंचन कौर राजपूत को 8 अक्टूबर 2026 की अपराह्न से जिला कार्यालय राजनांदगांव से कार्यमुक्त कर दिया गया तथा उन्हें अपने मूल पदस्थापना स्थल पशु औषधालय देवरी (केसीजी) में तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए।
शिकायतकर्ता बोले—नियमों से ऊपर कोई नहीं
मंदीप सिंह ने कहा कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर संलग्नीकरण किया गया था, जिससे देवरी क्षेत्र के किसान और पशुपालक परेशान हो रहे थे। सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन को लेकर उन्होंने कलेक्टर से शिकायत की थी। उनके मुताबिक, आदेश निरस्त होने की कार्रवाई यह दर्शाती है कि शासकीय व्यवस्था में नियमों का पालन आवश्यक है और कोई भी नियमों से ऊपर नहीं है।
हालांकि, शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल विभाग ने संलग्नीकरण आदेश निरस्त कर कर्मचारी को मूल पदस्थापना पर लौटाने की कार्रवाई की है।


