खैरागढ़. अक्षय तृतीया (अक्ती) के आगमन के साथ ही शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में उत्सव का माहौल बनना शुरू हो गया है। आगामी 19 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर बाजारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूप से इस दिन गुड्डा-गुडिय़ों के विवाह का आयोजन किया जाता है, जो न केवल बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भी जीवंत प्रतीक है।
शहर के जयस्तंभ चौक, इतवारी बाजार और गोलबाजार क्षेत्र में इन दिनों मिट्टी से बने पारंपरिक गुड्डे-गुडिय़ों की दुकानों की कतारें सज गई हैं। बच्चे और अभिभावक बड़ी संख्या में इनकी खरीदारी के लिए बाजार पहुंच रहे हैं। विशेष मुहूर्त में गुड्डा-गुडिय़ों के विवाह का आयोजन कर बच्चे पारंपरिक रस्मों को खेल-खेल में निभाते हैं, जिससे सांस्कृतिक मूल्यों का सहज संवहन होता है।
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है और विवाह जैसे कार्यक्रमों के लिए इसे श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष भी अक्ती का दिन विवाह के लिए अत्यंत अनुकूल है, जिसके चलते कई परिवारों में शहनाई की तैयारियां जोरों पर हैं।
पर्व के मद्देनजर बाजारों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सराफा बाजार, कपड़ा और बर्तन व्यापारियों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। हालांकि इस बार सोने-चांदी की कीमतों में वैश्विक स्तर पर आई तेजी के कारण आम उपभोक्ता सीमित खरीदारी कर रहे हैं, फिर भी पर्व के अवसर पर कारोबार में उछाल की उम्मीद जताई जा रही है। कपड़ा और बर्तन बाजार में भी अच्छी बिक्री की संभावना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी जोरों पर हैं। घर-घर में पूजन, हवन और अन्य अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व भी अत्यंत विशेष है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। उनके जन्मोत्सव के अवसर पर विभिन्न धार्मिक आयोजन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शहर सहित अंचल में सामूहिक कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
इस प्रकार अक्षय तृतीया का पर्व इस बार भी परंपरा, आस्था और उत्साह का अनूठा संगम लेकर आ रहा है, जहां एक ओर बच्चों के खेल में संस्कृति जीवंत होगी, वहीं दूसरी ओर मांगलिक कार्यों की शुरुआत के साथ समाज में उल्लास का वातावरण बनेगा।




