दुर्ग (धमधा). किसी विद्यालय की पहचान केवल उसकी इमारत, कक्षाओं या संसाधनों से नहीं होती, बल्कि उसके विकास के प्रति समाज की प्रतिबद्धता और सामूहिक भागीदारी से तय होती है। जब पूरा गांव बिना किसी मतभेद के लगातार दूसरी बार एक ही व्यक्ति को विद्यालय के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंप दे, तो यह उसके कार्य, नेतृत्व क्षमता और जनविश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। ऐसा ही उदाहरण धमधा विकासखंड के ग्राम घोटवानी में देखने को मिला, जहां प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय के एकीकरण (मर्ज) के बाद गठित नई शाला विकास समिति में वरिष्ठ पत्रकार हेमंत पाल को सर्वसम्मति से लगातार दूसरी बार अध्यक्ष चुना गया। समिति के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी टकेश्वर वर्मा को सौंपी गई।

ग्राम घोटवानी का प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय धमधा विकासखंड के उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। अनुशासित शैक्षणिक वातावरण, स्वच्छ एवं व्यवस्थित परिसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा लगातार बेहतर परीक्षा परिणामों के कारण यह विद्यालय क्षेत्र में मिसाल माना जाता है। विद्यालय की उपलब्धियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से प्रतिवर्ष कई विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय सहित अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में होता रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि अपने पिछले कार्यकाल के दौरान हेमंत पाल ने पत्रकारिता की व्यस्तताओं के बावजूद विद्यालय के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने विद्यालय को केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि गांव के भविष्य की आधारशिला मानते हुए नियमित मॉनिटरिंग की। शिक्षकों के साथ सतत समन्वय स्थापित किया, बच्चों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया, अभिभावकों से निरंतर संवाद बनाए रखा तथा विद्यालय का सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। यही कारण रहा कि गांव के लोगों ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी।

दूसरी बार अध्यक्ष चुने जाने के बाद हेमंत पाल ने कहा कि "विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने की पाठशाला है। हमारा उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा, अच्छे संस्कार, अनुशासन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। शिक्षकों, अभिभावकों और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से घोटवानी विद्यालय को जिले के आदर्श विद्यालयों में स्थापित करने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय का समग्र विकास तभी संभव है जब शिक्षक, पालक, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण एक साझा उद्देश्य के साथ कार्य करें। आने वाले समय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार और विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी।
शाला विकास समिति के गठन के दौरान ग्राम सरपंच डामन वर्मा, डॉ. देवेंद्र उमरे, खमन साहू, तामेश्वर पाल, चंद्रशेखर वर्मा, महेंद्र प्रताप गुप्ता, मुकेश सिन्हा, सुरेश वर्मा, सांसद प्रतिनिधि प्रेमलाल सिंह, केसलाल यादव, संदीप निषाद, मनोज वर्मा, अजय चतुर्वेदी, प्रधान पाठक गिरधर सिंह राजपूत, संकुल प्रभारी बेनी माधव देवांगन, रेखाराम साहू, डोमनलाल वर्मा, यशपाल पटेल सहित शिक्षक, समिति सदस्य, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय का विकास केवल शासन की योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता से संभव होता है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक माहौल और उज्ज्वल भविष्य उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयास सबसे बड़ी ताकत है। इसी सोच के साथ गांव ने एक बार फिर अपने विश्वास पर मुहर लगाते हुए विद्यालय के नेतृत्व की जिम्मेदारी हेमंत पाल को सौंप दी, जिससे विद्यालय के विकास और नई उपलब्धियों की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।


