खैरागढ़/गंडई. छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ अंचल की लोकआस्था, संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत अब देश के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव के श्रीचरणों तक पहुंचेगी। सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के तहत जिले के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से पवित्र जल, मिट्टी एवं अखंड धूनी की भस्म का संग्रहण कर गुजरात के सोमनाथ धाम भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है। श्रद्धालुओं का दल 22 जून को इन पावन कलशों के साथ गुजरात के लिए रवाना होगा।
रविवार को बाबा रूख्खड़ स्वामी की तपोभूमि स्थित पावन शिवपीठ एवं निर्मल त्रिवेणी क्षेत्र में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। आमनेर, पिपरिया और मुस्का नदियों के संगम स्थल निर्मल त्रिवेणी से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र जल का संग्रह किया गया। वहीं बाबा रूख्खड़ स्वामी की तपोभूमि से पवित्र मिट्टी संकलित कर विधिवत कलश में सुरक्षित रखी गई। विशेष रूप से वर्षों से निरंतर प्रज्वलित अखंड धूनी की पावन भस्म को भी मिट्टी के साथ सम्मिलित किया गया, जिसे सोमनाथ महादेव के श्रीचरणों में अर्पित किया जाएगा।
इसी क्रम में गंडई क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व वाले घटियारी शिव मंदिर, बिरखा से भी विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पवित्र मिट्टी का संग्रहण किया गया। मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामवासी एवं ग्राम धरोहर समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक अवसर बताया।
कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड के जिला मुख्य आयुक्त भागवत शरण सिंह के नेतृत्व में निर्मल त्रिवेणी महाअभियान के संयोजक सूरज देवांगन, योग गुरु गौतम सोनी तथा समाजसेवी मंगल सारथी ने त्रिवेणी जल का संकलन किया। वहीं श्री रूख्खड़ स्वामी ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष रामकुमार सिंह की अगुवाई में महंत प्रमोद गिरी गोस्वामी, सदस्य उत्तम दशरिया तथा अन्य श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थलों से पवित्र मिट्टी का संग्रहण किया। इस दौरान "हर-हर महादेव" और "जय सोमनाथ" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस यात्रा का एक विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पक्ष भी चर्चा में है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार बाबा रूख्खड़ स्वामी को मां नर्मदा का अनन्य भक्त माना जाता है। वहीं गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में भी "रुक्खड़ बावा", "रुक्खड़ बापू" और "रुक्खड़ दादा" के रूप में उनसे जुड़ी लोकआस्था आज भी जीवंत है। गिरनार पर्वत की प्रसिद्ध लीली परिक्रमा में गाए जाने वाले लोकभजनों से लेकर अमरेली जिले के राजुला स्थित वावड़ी ग्राम तथा भावनगर क्षेत्र के विभिन्न आस्था केंद्रों तक रुक्खड़ परंपरा के अनेक संदर्भ मिलते हैं, जो छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की झलक प्रस्तुत करते हैं।
सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा में जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले श्रद्धालुओं में डॉ. पीसीलाल यादव, राजकुमार मसखरे, मुकेश कुमार, नीरज साहू, लच्छू यादव, बोधन सिंह चंदेल और धर्मेंद्र कुमार जंघेल शामिल हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल दर्शन और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि उन आध्यात्मिक सूत्रों को पहचानने का माध्यम भी है जो नर्मदा, संत परंपरा, गिरनार, राजुला, भावनगर और सोमनाथ को एक अदृश्य आस्था के धागे में जोड़ते हैं।
श्रद्धालुओं के अनुसार जब निर्मल त्रिवेणी का जल, बाबा रूख्खड़ स्वामी की तपोभूमि की मिट्टी, अखंड धूनी की भस्म तथा घटियारी शिव मंदिर की पावन मिट्टी भगवान सोमनाथ महादेव के श्रीचरणों में अर्पित होगी, तब केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि खैरागढ़ अंचल की श्रद्धा, सांस्कृतिक विरासत और संत परंपरा का संदेश भी देशभर में पहुंचेगा। यही कारण है कि पूरे क्षेत्र में इस यात्रा को लेकर विशेष उत्साह और गौरव का वातावरण बना हुआ है।


