खैरागढ़/छुईखदान. श्री सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना और प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजनाओं के विरोध में छुईखदान अंचल के किसानों ने सोमवार को भिलाई में बड़ा प्रदर्शन किया। किसान अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले दनिया, अतरिया, हनईबन, उदयपुर सहित आसपास के गांवों से हजारों किसान 80 से अधिक बसों और चारपहिया वाहनों के काफिले में सवार होकर पर्यावरण विभाग, बत्तीस बंगला भिलाई पहुंचे। यहां घंटों चले प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कार्यालय परिसर को घेरकर पर्यावरण, खनन, राजस्व और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही श्री सीमेंट कंपनी के विरोध में भी जमकर आवाज बुलंद की।

आंदोलन का नेतृत्व समिति की अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल, मुकेश पटेल, नोहर जंघेल, प्रमोद सिंह, बीरेंद्र जंघेल, श्रवण जंघेल, विक्रम सिंह और सौरभ जंघेल सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया। विष्णु मंडल, कैलाश जंघेल, रोहित जंघेल, ऐमन जंघेल, लेखा वर्मा, हुकुम जंघेल और लकी जंघेल समेत क्षेत्र के हजारों किसान प्रदर्शन में शामिल हुए। किसानों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर संडी, हनईबन, बुंदेली और सीताडबरी सहित सभी प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजनाओं को स्थायी रूप से निरस्त करने तथा श्री सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना पर रोक लगाने की मांग की।
खेती, पानी और पर्यावरण पर संकट का जताया खतरा

प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि प्रस्तावित चूना पत्थर खदानों से उपजाऊ कृषि भूमि बंजर हो सकती है, भूजल स्तर नीचे जा सकता है और सीमेंट फैक्ट्री से निकलने वाली धूल से फसलों के साथ आम लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन, पानी और हवा पर संकट पैदा किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और खेती को बचाने के लिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
महिला किसानों की भागीदारी बनी आकर्षण

आंदोलन में महिला किसानों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न गांवों से पहुंचीं महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन में आगे रहीं और परियोजनाओं के विरोध में नारेबाजी की। महिलाओं का कहना था कि खेत नहीं बचेंगे तो परिवार का चूल्हा कैसे जलेगा। प्रदर्शन में क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों, पंचों, समिति पदाधिकारियों और आम किसानों ने भी हिस्सा लिया। सुबह से भिलाई की ओर रवाना हुए वाहनों के काफिले के कारण भिलाई-दुर्ग मार्ग पर भी आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी।
तीन प्रमुख मांगों पर अड़े किसान
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, संडी, हनईबन, सीताडबरी और बुंदेली सहित सभी प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजनाओं को तत्काल और स्थायी रूप से निरस्त किया जाए। दूसरी, श्री सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना पर हमेशा के लिए रोक लगाई जाए तथा किसानों से ली गई कृषि भूमि उन्हें वापस लौटाई जाए। तीसरी, किसानों की सहमति के बिना पर्यावरण विभाग कोई जनसुनवाई आयोजित न करे और न ही पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करे।
आश्वासन से संतुष्ट नहीं, अब विधानसभा घेराव की चेतावनी
ज्ञापन लेने के बाद संबंधित अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि किसान नेताओं ने साफ किया कि यदि इस बार भी केवल आश्वासन मिला तो अगला आंदोलन राजधानी रायपुर में विधानसभा का घेराव कर किया जाएगा। समिति अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि किसान कई वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन उनकी बातों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन बचाने की है और किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं।
ज्ञापन सौंपने के बाद किसान वापस लौट गए, लेकिन इस प्रदर्शन ने छुईखदान और आसपास के पूरे ग्रामीण अंचल में श्री सीमेंट फैक्ट्री तथा चूना पत्थर खनन परियोजनाओं के विरोध को एक बार फिर सामने ला दिया है। किसानों ने संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


