खैरागढ़. नमामि भारत अभियान के अंतर्गत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर खैरागढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर/उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रगीत के संपूर्ण पदों का सामूहिक गायन आयोजित किया गया। विद्या भारती द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में निर्धारित समय सुबह 11 बजे एक साथ सामूहिक गायन हुआ। आयोजन का उद्देश्य व्यापक स्तर पर सामूहिक गायन के माध्यम से इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मुहिम का हिस्सा बनना रहा।

विद्यालय परिसर में करीब 1000 छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने एक साथ एक स्वर में तीन मिनट में वंदे मातरम् के संपूर्ण पदों का सामूहिक गायन किया। इस दौरान पूरा परिसर राष्ट्रगीत के सामूहिक स्वर से गूंज उठा।
‘वंदे मातरम् मात्र गीत नहीं, राष्ट्र की भावना’
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संयोजक भारत स्काउट एवं गाइड के जिला मुख्य आयुक्त भागवत शरण सिंह ने कहा कि “वंदे मातरम् मात्र एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की भावना है।” उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में राष्ट्र को केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि माता के रूप में देखने की परंपरा रही है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् के संपूर्ण पदों में भारतभूमि को माता के रूप में संबोधित करते हुए उसकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति की गई है।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का यही राष्ट्रभाव स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण शक्ति बना। इस गीत ने देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना और एकजुटता का भाव जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व से परिचित कराना आवश्यक है।
राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रगीत के प्रति भी हो सम्मान
भागवत शरण सिंह ने कहा कि राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रगीत के प्रति भी सम्मान की भावना होनी चाहिए। सभी शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् के नियमित एवं संपूर्ण गायन की परंपरा विकसित हो तथा यह गीत भारत के गौरव और राष्ट्रभावना का संदेश विश्व पटल तक पहुंचाए।
सभी शिक्षण संस्थानों में संपूर्ण गायन पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र कुमार देवांगन ने कहा कि विद्या भारती द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् का गायन पहले से होता रहा है। अब प्रयास होना चाहिए कि सभी शिक्षण संस्थानों में इसके संपूर्ण पदों का गायन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि आज गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सरस्वती शिशु मंदिर का नाम सबसे ज्यादा संख्या में वंदे मातरम् गीत गाने के रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि यह रिकॉर्ड हर साल टूटे और देश का बच्चा-बच्चा वंदे मातरम् गाए।
संपूर्ण गायन से समझेंगे राष्ट्रगीत का भाव और इतिहास
विशिष्ट अतिथि एवं साक्षी के रूप में उपस्थित सहायक संचालक मनोहर चंदेल ने वंदे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संपूर्ण पदों के सामूहिक गायन से विद्यार्थियों और आमजन को राष्ट्रगीत के भाव एवं ऐतिहासिक महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् महज गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की भावना का सशक्त अभिव्यक्तिकरण है।

कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन प्रेम स्मृति शिक्षा समिति के अध्यक्ष मनोज गिड़िया ने किया, जबकि संचालन विद्यालय के प्राचार्य जितेंद्र शर्मा ने किया। इस अवसर पर पूर्व जनपद उपाध्यक्ष राकेश गुप्ता, एकल विद्यालय के प्रमुख श्रीराम यादव सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर राष्ट्रगीत के सामूहिक स्वर से गूंज उठा और उपस्थित जनों ने राष्ट्रभावना से जुड़े इस आयोजन में सहभागिता निभाई।


