खैरागढ़. जिले की सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कुछ दिन पहले वनांचल ग्राम खाम्ही के प्राथमिक स्कूल में बच्चों के पानी भरने और बर्तन साफ करने की तस्वीर सामने आने के बाद अब जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर राहुद प्राथमिक स्कूल से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। यहां छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई करने के बजाय मध्यान्ह भोजन के बर्तन साफ करते नजर आए। इस तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहुद प्राथमिक स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनने से पहले बच्चे खुद बर्तनों की सफाई करते दिखाई दिए। जिन हाथों में किताब, कॉपी और पेंसिल होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में बर्तन नजर आए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्कूल बच्चों को शिक्षा देने के लिए हैं या उनसे स्कूल की व्यवस्था से जुड़े काम कराने के लिए?
संकुल प्रभारी के जवाब ने बढ़ाए सवाल
मामला सामने आने के बाद जब संकुल प्रभारी से इस संबंध में सवाल किया गया तो उनका जवाब भी चर्चा में आ गया। संकुल प्रभारी का कहना था कि बच्चे स्कूल समय से पहले पहुंच जाते हैं और उस दौरान जो भी होता है, उसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं है। उन्होंने कहा कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक की ही उनकी जिम्मेदारी है।
संकुल प्रभारी के इस जवाब के बाद स्कूलों में बच्चों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। यदि बच्चे स्कूल परिसर में समय से पहले पहुंचते हैं और वहां सफाई या बर्तन साफ करने जैसे काम करते हैं, तो उनकी निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या स्कूल की जिम्मेदारी केवल स्कूल लगने के समय से शुरू होकर छुट्टी के साथ खत्म हो जाती है?
खाम्ही के बाद राहुद की तस्वीर से बढ़ी चिंता
खाम्ही प्राथमिक स्कूल के बाद अब राहुद प्राथमिक स्कूल की तस्वीर सामने आने से मामला किसी एक स्कूल तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। लगातार सामने आ रही ऐसी तस्वीरों ने जिले की सरकारी स्कूलों में बच्चों की निगरानी, स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीईओ ने दिए जांच के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र कुमार देवांगन ने जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिले के सभी स्कूलों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि बच्चों से इस तरह का काम नहीं कराया जाए।

अब सवाल यह है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती है या मामले में जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई भी की जाती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि भविष्य में स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के बजाय इस तरह के कामों में लगाए जाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग पाती है या नहीं।


