मनरेगा में मजदूरी को तरसे ग्रामीण: 8 सप्ताह से भुगतान ठप, जिपं सदस्य निर्मला वर्मा ने सरकार को घेरा
खैरागढ़. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में काम करने वाले मजदूरों के सामने इस समय बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जिला पंचायत सदस्य निर्मला विजय वर्मा ने केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि पिछले 8 सप्ताह से मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने इसे सरकार की 'किसान और गरीब विरोधी' नीति करार दिया है।
मनमोहन सरकार की योजना, भाजपा में बदहाली: निर्मला वर्मा
निर्मला विजय वर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने ग्रामीणों के पलायन को रोकने के उद्देश्य से इस ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा, "जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब गरीबों को उनके अपने ही गांव में 100 दिनों के रोजगार का अधिकार मिला था। इस योजना के आते ही गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन थम गया था, लेकिन आज की सरकार केवल नाम बदलने और वाहवाही लूटने में व्यस्त है।"
भुगतान न होने से ग्रामीणों में हाहाकार
जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। 8 हफ्तों से भुगतान न होने के कारण मजदूर अपने दैनिक खर्चों और राशन के लिए मोहताज हो रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह 'ढपोसला सरकार' केवल दिखावे की राजनीति कर रही है। धरातल पर मजदूरों को उनके हक का पैसा नहीं मिल रहा है, जिससे इस वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है।
पलायन का फिर बढ़ने लगा खतरा
निर्मला वर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू नहीं किया गया, तो ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन फिर से शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा, "इस सरकार के पास किसी भी वर्ग के कल्याण के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। यह सरकार आने वाले समय में किसान और गरीबों को पूरी तरह ले डूबेगी।"


