खैरागढ़. विभागीय पदोन्नति में वर्षों से हो रही देरी और वेतन विसंगति समेत लंबित मांगों को लेकर राजस्व पटवारी संघ, छत्तीसगढ़ के आह्वान पर सोमवार को राजस्व पटवारी संघ खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) के बैनर तले जिलेभर के पटवारियों ने जिला मुख्यालय खैरागढ़ के अंबेडकर चौक में एकदिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न तहसीलों से पहुंचे बड़ी संख्या में पटवारियों ने "हमारी मांगे पूरी करो" और "आवाज दो, हम एक हैं" जैसे नारों के साथ शासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

संघ के संभाग अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा ने कहा कि विभागीय पदोन्नति और वेतन विसंगति की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शासन और प्रशासन के समक्ष मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि इस एकदिवसीय आंदोलन के बाद भी सरकार ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो प्रांतीय नेतृत्व के निर्देश पर पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।
सोमवार होने के कारण बड़ी संख्या में किसान, विद्यार्थी और आम नागरिक आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र तथा भूमि संबंधी कार्यों के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन पटवारियों के सामूहिक अवकाश के कारण अधिकांश राजस्व कार्य प्रभावित रहे। प्रमाण पत्रों के सत्यापन, भूमि अभिलेखों से जुड़े कार्य और अन्य राजस्व सेवाएं ठप रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई आवेदकों को बिना काम कराए लौटना पड़ा।
संघ की प्रमुख मांगें
राजस्व पटवारी संघ ने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में पटवारियों की पदोन्नति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है। परिणामस्वरूप अनेक कर्मचारी पटवारी पद पर ही पूरी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिससे उनका मनोबल और कार्यकुशलता प्रभावित होती है। संघ ने मांग की है कि—
पटवारियों की पदोन्नति के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित की जाए।
राजस्व निरीक्षक (आरआई) के पदों पर सीधी भर्ती पूरी तरह बंद की जाए।
आरआई के सभी रिक्त पद केवल पटवारियों की पदोन्नति से भरे जाएं।
पदोन्नति का स्वरूप 50 प्रतिशत वरिष्ठता और 50 प्रतिशत विभागीय परीक्षा के आधार पर तय किया जाए।
वर्षों से लंबित विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए।
नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा भी शीघ्र आयोजित की जाए।
वेतन विसंगति दूर करने की भी मांग
संघ ने ज्ञापन में वेतन निर्धारण की गंभीर विसंगतियों का भी उल्लेख किया। बताया गया कि वर्ष 2010 भर्ती बैच में 1 जुलाई 2025 की स्थिति में ग्रेड पे 2200 से 2400 होने पर मूल वेतन 36,200 रुपये निर्धारित है, जबकि ग्रेड पे 2200 से 2400 से बढ़कर 2800 होने पर मूल वेतन 35,300 रुपये तय किया गया है। संघ का कहना है कि ग्रेड पे बढ़ने के बाद मूल वेतन कम होना वेतन संरचना के सिद्धांतों के विपरीत है। उनके अनुसार ऐसी स्थिति में मूल वेतन 36,400 रुपये होना चाहिए था। संघ ने यह भी कहा कि इसी प्रकार की वेतन विसंगतियां अन्य भर्ती बैचों में भी हैं तथा एक ही भर्ती बैच, समान नियुक्ति तिथि और समान सेवा अवधि वाले पटवारियों का वेतन अलग-अलग तहसीलों में भिन्न-भिन्न निर्धारित किया गया है, जिसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
संघ ने शासन से मांग की है कि पदोन्नति और वेतन संबंधी सभी विसंगतियों का शीघ्र समाधान कर कर्मचारियों में व्याप्त असंतोष समाप्त किया जाए। वहीं आंदोलन के कारण जिले की राजस्व व्यवस्था पर प्रत्यक्ष असर देखने को मिला और आम नागरिकों के जरूरी कार्य पूरे दिन प्रभावित रहे।


