खैरागढ़. अंतरजातीय विवाह के बाद कथित सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड का मामला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम देवरी से सामने आया है। गांव के निवासी एवं अधिवक्ता नेमीचंद वर्मा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दूसरे समाज में विवाह करने के कारण उन्हें और उनके परिवार को न केवल समाज से बाहर कर दिया गया, बल्कि पहले ₹35 हजार की राशि वसूली गई, उसके बाद सामूहिक भोज और धार्मिक अनुष्ठान कराने के बावजूद आज तक समाज में शामिल नहीं किया गया।

शिकायत के अनुसार, नेमीचंद वर्मा ने सितंबर 2025 में प्रमिला सोनकर से विवाह किया था। विवाह के बाद लोधी समाज की बैठक में उनके परिवार पर कथित रूप से ₹35 हजार का जुर्माना लगाया गया। आरोप है कि परिवार ने समाज के दबाव में यह राशि जमा कर दी, लेकिन इसके बाद भी समाज के लोगों ने उन्हें सामूहिक भोज कराने और वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करने के लिए बाध्य किया।

आवेदन में कहा गया है कि समाज द्वारा बताए गए सभी निर्देशों का पालन करने के बावजूद शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी को अब तक सामाजिक मान्यता नहीं दी गई। आरोप है कि समाज के लोगों को उनसे दूरी बनाए रखने, किसी भी सामाजिक अथवा पारिवारिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करने तथा किसी भी प्रकार का सहयोग न करने के निर्देश दिए गए। इससे उन्हें लगातार मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने गांव के प्रमुख हुकुम वर्मा से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। हालांकि, शिकायत के अनुसार उन्हें बताया गया कि गांव में इस तरह के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं और ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई ही प्रभावी समाधान हो सकती है।
नेमीचंद वर्मा ने अपने आवेदन में दावा किया है कि उनके पास एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें समाज के एक सदस्य के साथ हुई बातचीत में कथित जुर्माना, सामाजिक बहिष्कार और राशि जमा कराने का उल्लेख है। उन्होंने पुलिस जांच के दौरान इस रिकॉर्डिंग को उपलब्ध कराने तथा उसकी फॉरेंसिक जांच कराने की भी मांग की है।
शिकायत में सुकरीत वर्मा, कोदू वर्मा, समय लाल वर्मा, जैत वर्मा और चंद्रबहादुर वर्मा को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने, कथित रूप से वसूले गए ₹35 हजार वापस दिलाने तथा भविष्य में उन्हें और उनके परिवार को किसी भी प्रकार के सामाजिक उत्पीड़न और बहिष्कार से सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय को शिकायत सौंप दी गई है। मामले में पुलिस द्वारा आवेदन की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


