खैरागढ़. विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर रानी रश्मि देवी कॉलेज, खैरागढ़ में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार एवं छात्र-छात्राओं के साथ संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक समस्याओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना था। इस दौरान विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के साथ ही तनाव और अन्य मानसिक चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल शुक्ला, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओ. पी. गुप्ता, जितेंद्र साखरे, नंद कुमार नेवांगन, मंडावी, तुर्रे सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. पंकज वैष्णव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोनल ध्रुव, सहायक नोडल अधिकारी नागेश सिम्कर तथा विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।
अवसाद, चिंता और मोबाइल की लत पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्यार्थियों को अवसाद (डिप्रेशन), चिंता (एंग्जायटी), मोबाइल की लत, मादक पदार्थों के दुरुपयोग तथा आत्महत्या की प्रवृत्ति की रोकथाम के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने, उनके शुरुआती संकेतों को पहचानने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के महत्व पर जागरूक किया गया।
परीक्षा के तनाव से निपटने के बताए उपाय

सेमिनार में पढ़ाई और परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव के साथ दैनिक जीवन में उत्पन्न होने वाली मानसिक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को इन परिस्थितियों से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई, ताकि वे मानसिक दबाव को बेहतर तरीके से संभाल सकें और अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रख सकें।

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना, समस्याओं पर खुलकर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा मानसिक परेशानियों को लेकर समाज में व्याप्त झिझक और भ्रांतियों को दूर करना है।


