रायपुर. राजधानी रायपुर के पास माना थाना क्षेत्र के नकटी गांव के समीप स्थित चर्चित ‘ब्लू वाटर’ में 24 वर्षीय आदिल खान के डूबने के बाद अब उसकी तलाश के लिए अभियान और तेज किया जा रहा है। घटना के 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आदिल का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अब भारतीय नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली जा रही है। विशाखापट्टनम स्थित ईस्टर्न नेवल कमांड से एक अधिकारी और 10 विशेषज्ञ नौसैनिक गोताखोरों की टीम 23 अगस्त को रायपुर पहुंचेगी और इसके बाद ब्लू वाटर में सर्च ऑपरेशन शुरू करेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने घटना की जानकारी मिलने के बाद आदिल की तलाश के लिए हरसंभव संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में भारतीय नौसेना के विशेष गोताखोर दल को बुलाया गया है। बताया गया है कि टीम दोपहर करीब 2 से 3 बजे रायपुर पहुंचेगी। टीम के सदस्य पानी के भीतर खोज एवं बचाव अभियानों में विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं।
दोस्तों के साथ पहुंचा था आदिल, पानी पार करने की लगी थी शर्त
जानकारी के मुताबिक आदिल खान बुधवार 19 अगस्त की शाम अपने तीन दोस्तों के साथ ब्लू वाटर घूमने पहुंचा था। यहां दोस्तों के बीच पानी पार करने की शर्त लगी। शर्त के दौरान आदिल और उसका एक दोस्त तौफीक पानी में कूद गए। कुछ दूरी तय करने के बाद दोनों की सांस फूलने लगी और वे वापस लौटने लगे। तौफीक तो किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन आदिल गहरे पानी में चला गया और फिर वापस नहीं लौट सका।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। माना थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने भी घटनास्थल का जायजा लिया।
रात होने के कारण तत्काल शुरू नहीं हो सका सर्च ऑपरेशन
घटना शाम के समय हुई और रात हो जाने के कारण तत्काल बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू नहीं किया जा सका। अगले दिन एसडीआरएफ की टीम ने पानी के भीतर आदिल की तलाश शुरू की। संभावित स्थानों पर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली।
अब 72 घंटे से अधिक समय गुजर चुका है। इसके बावजूद आदिल का कोई सुराग नहीं मिलने के कारण तलाश अभियान को और अत्याधुनिक तथा विशेषज्ञ स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत भारतीय नौसेना की विशेषज्ञ टीम को विशाखापट्टनम से बुलाया जा रहा है।
खूबसूरत ‘ब्लू वाटर’ बन चुका है जानलेवा स्पॉट
नकटी गांव के पास स्थित ब्लू वाटर अपनी नीली रंगत, ऊंची चट्टानों और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यहां बड़ी संख्या में लोग पिकनिक और घूमने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन खूबसूरती के पीछे छिपा खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है।
लोग गहरे पानी की वास्तविक स्थिति जाने बिना इसमें उतर जाते हैं। नहाने, तैरने, सेल्फी लेने और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के दौरान कई बार लोग जोखिम की सीमा पार कर जाते हैं। स्थानीय स्तर पर इसे बेहद गहरा और खतरनाक जलक्षेत्र माना जाता है। पानी की गहराई 400 फीट से अधिक बताए जाने के साथ यहां कई हिस्सों को ‘डार्क जोन’ माना जाता है, जहां नीचे की स्थिति स्पष्ट नहीं होती। पानी बेहद ठंडा होने के कारण लंबे समय तक तैरना भी मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा आसपास की चट्टानें फिसलन भरी हैं।
वर्षों से सामने आ रहे हैं हादसे
ब्लू वाटर में डूबने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। पिछले कई वर्षों में यहां कई लोगों की जान जा चुकी है। उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार—
2017: 17 वर्षीय सुनैना की डूबने से मौत।
मई 2019: 17 वर्षीय मोहन बाघ की डूबने से मौत।
मार्च 2023: पिकनिक मनाने पहुंचे दो दोस्तों की डूबने से मौत।
जून 2023: नदीम, फैजल और शहबाज की डूबने से मौत।
ताजा मामला: 24 वर्षीय आदिल खान लापता।
स्थानीय स्तर पर पिछले करीब 10 वर्षों में यहां 50 से ज्यादा लोगों की मौत होने का दावा किया जाता रहा है। इनमें बड़ी संख्या युवाओं और किशोरों की बताई जाती है।
चेतावनी बोर्ड लगे, लेकिन निगरानी पर सवाल
ब्लू वाटर में लगातार होने वाले हादसों के बावजूद यहां लोगों की आवाजाही पूरी तरह थम नहीं पाई है। खतरे को देखते हुए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगा देना पर्याप्त है या वहां नियमित निगरानी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है?
यहां न तो पर्याप्त सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था दिखाई देती है और न ही ऐसी सख्त निगरानी, जिससे लोग खतरनाक हिस्सों में जाने से रोके जा सकें। यही वजह है कि चेतावनियों के बावजूद लोग पानी में उतरने का जोखिम उठाते हैं।
हादसों के बाद भी नहीं रुक रही ‘जानलेवा पिकनिक’
ब्लू वाटर में हादसों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद यह स्थान युवाओं के लिए पिकनिक और मौज-मस्ती का केंद्र बना हुआ है। पानी में उतरना, तैरने की कोशिश करना और एक-दूसरे को चुनौती देना कई बार जानलेवा साबित हो चुका है।
आदिल के मामले में भी दोस्तों के बीच लगी पानी पार करने की शर्त ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक छोटी-सी चुनौती देखते ही देखते जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई में बदल गई।
अब नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों से उम्मीद
लगातार तलाश के बावजूद आदिल का पता नहीं चल पाने के बाद अब भारतीय नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों से उम्मीदें बढ़ गई हैं। ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापट्टनम की विशेष टीम में एक अधिकारी के साथ 10 विशेषज्ञ नौसैनिक शामिल हैं। ये जवान पानी के भीतर खोज और बचाव अभियानों में विशेष दक्षता रखते हैं।
टीम के रायपुर पहुंचने के बाद ब्लू वाटर में सर्च ऑपरेशन को नए सिरे से और अधिक विशेषज्ञता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर आदिल की तलाश को जल्द से जल्द अंजाम तक पहुंचाया जाए।
बड़ा सवाल—कब रुकेगा मौत का सिलसिला?
ब्लू वाटर की खूबसूरती अब लगातार होने वाले हादसों के कारण सवालों के घेरे में है। एक के बाद एक डूबने की घटनाएं सामने आने के बावजूद यहां लोगों की आवाजाही और पानी में उतरने का सिलसिला जारी है।
आदिल की तलाश के लिए नौसेना की विशेष टीम बुलाना फिलहाल तत्काल राहत और खोज अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या हर हादसे के बाद रेस्क्यू टीम बुलाने के बजाय ब्लू वाटर को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए ठोस व्यवस्था नहीं की जानी चाहिए?
खतरे वाले हिस्सों में प्रवेश पर प्रभावी रोक, पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई जैसे उपायों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। क्योंकि चेतावनी के बावजूद यदि लोग बार-बार गहरे पानी में उतरते रहे, तो खूबसूरत दिखने वाला यह ‘ब्लू वाटर’ आने वाले दिनों में भी किसी और परिवार के लिए मातम की वजह बन सकता है।


