खैरागढ़. विद्यार्थियों में माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा, सहयोग और दायित्वबोध विकसित करने के उद्देश्य से खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत शिक्षा विभाग द्वारा अभिनव पहल की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र कुमार देवांगन द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब 1 अक्टूबर 2026 को विकासखंड स्तर तथा 3 अक्टूबर 2026 को जिला स्तर पर राष्ट्रीय ड्राइंग/चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।

अभियान के तहत जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में कक्षा तीसरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों से अपने माता-पिता अथवा पालकों के नाम ‘सेवा संकल्प पत्र’ लिखवाया जाएगा। पत्र में विद्यार्थी माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा, सहयोग तथा अपने दायित्वों के निर्वहन का संकल्प व्यक्त करेंगे। विद्यालय स्तर पर तैयार किए गए पत्रों को सुरक्षित रखने तथा निर्धारित कार्यक्रमों में आवश्यकता के अनुसार प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
30 सितंबर को हर स्कूल में गूंजेगा ‘नमो गीत’
इस अभियान की सबसे खास कड़ी तीन मिनट का ‘नमो गीत’ है। जिला शिक्षा अधिकारी उपेंद्र कुमार देवांगन ने स्वयं इस गीत की रचना की है, जबकि माइल स्टोन पब्लिक स्कूल द्वारा गीत की संगीत एवं गायन रिकॉर्डिंग तैयार की गई है।
कार्यक्रम के अनुसार 30 सितंबर 2026 को जिले के प्रत्येक शासकीय एवं अशासकीय विद्यालय में प्रार्थना के समय इस ऑडियो को प्रस्तुत किया जाएगा। इस तरह एक ही दिन जिलेभर के स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच सेवा, संकल्प और जिम्मेदारी का संदेश गीत के माध्यम से पहुंचाया जाएगा।
नृत्य-नाटिका के रूप में होगी विशेष प्रस्तुति
इसी गीत को 1 अक्टूबर को विकासखंड स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता तथा 3 अक्टूबर को जिला स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता के अवसर पर विशेष रूप से नृत्य-नाटिका के रूप में प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है। जिला स्तरीय आयोजन सेजेस कन्या खैरागढ़ में प्रस्तावित है।
शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें परिवार के प्रति सम्मान, सेवा, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है। विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों से माता-पिता के नाम सेवा संकल्प पत्र लिखवाने और उसके साथ सामूहिक गीत व सांस्कृतिक प्रस्तुति को जोड़ने का यह प्रयोग पूरे छत्तीसगढ़ में अपने तरह का नवाचार है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी शासकीय एवं अशासकीय शिक्षण संस्थाओं को निर्धारित समय-सीमा में गतिविधियां अनिवार्य रूप से आयोजित करने तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को इनके व्यापक संचालन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


