खैरागढ़. जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम पाण्डुका में इन दिनों कथित तौर पर मुरूम के अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार रोजाना कई मुरूम माफिया दिनदहाड़े जेसीबी और हाइवा की मदद से मुरूम निकालते नजर आते हैं। आरोप है कि लंबे समय से जारी इस गतिविधि पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। इससे जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है, वहीं बिना रॉयल्टी के खनिज उत्खनन और परिवहन होने पर शासन को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
सबसे गंभीर सवाल खनिज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर अवैध खनन की जानकारी विभागीय अधिकारियों को तत्काल फोन के माध्यम से दी गई। बताया गया कि मौके पर टीम भेजी जाएगी, लेकिन आरोप है कि तत्काल टीम नहीं पहुंची। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचती तो वहां से 5 से 6 हाइवा और जेसीबी वाहन जब्त किए जा सकते थे। ऐसे में सवाल है कि सूचना मिलने के बावजूद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
अधिकारी ने कहा- होगी कार्रवाई

मामले में खनिज अधिकारी बबलू पांडे ने कार्रवाई किए जाने की बात कही है। हालांकि कार्रवाई कब और किस स्तर पर होगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। अधिकारी के कार्रवाई के आश्वासन के बाद अब निगाहें विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कार्रवाई का आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि मौके पर जांच कर अवैध खनन और परिवहन की वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।
शिकायतों और खबरों के बाद भी सवाल बरकरार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाण्डुका में मुरूम खनन को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं और समाचार भी प्रकाशित हो रहे हैं, इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही। इसे लेकर खनिज विभाग पर कथित दबाव या संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कलेक्टर कार्यालय के सामने से गुजरते हैं मुरूम लदे वाहन
अवैध खनन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मुरूम का परिवहन बिना वैध दस्तावेज या रॉयल्टी के किया जा रहा है, तो ऐसे वाहन जिला मुख्यालय तक कैसे पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मुरूम से लदे वाहन कलेक्टर कार्यालय के सामने से होकर गुजरते हैं। ऐसे में खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था और जांच-पड़ताल की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पर्यावरण के साथ सरकारी राजस्व का भी सवाल
बेतरतीब मुरूम खनन से जमीन की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरण प्रभावित होने की आशंका है। वहीं वैध अनुमति और रॉयल्टी के बिना खनिज का उत्खनन एवं परिवहन शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने पाण्डुका क्षेत्र में तत्काल निरीक्षण कर खनन की अनुमति, रॉयल्टी, परिवहन दस्तावेज और मौके पर मौजूद वाहनों की जांच की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सूचना मिलने के बाद मौके पर 4 से 5 हाइवा और जेसीबी मिलने की संभावना बताई जा रही थी, तब तत्काल टीम क्यों नहीं भेजी गई? खनिज अधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन कार्रवाई कब होती है और जांच में क्या सामने आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


