खैरागढ़. जिले के कलेक्टरेट परिसर में बीते दिनों अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ग्राम कटंगी, गंडई निवासी शीतलाल निर्मलकर ने आत्मदाह का प्रयास किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शीतलाल ने अपने ऊपर मिट्टी तेल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों और कर्मचारियों की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पाया गया। शीतलाल को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है।
शीतलाल ने बताया कि वे काफी समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि गांव में कुछ लोग, जो खुद को समाज के मुखिया कहते हैं, मनमाने ढंग से अर्थदंड वसूलते हैं, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। इस सामाजिक बहिष्कार और उपेक्षा के कारण शीतलाल और उनका परिवार लगातार मानसिक तनाव में रहने लगे। शीतलाल ने कई बार थाना, एसडीएम कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और मानव अधिकार विभाग तक जाकर गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस निराशा और मानसिक दबाव के चलते उन्होंने यह खौफनाक आत्मघाती कदम उठाया।
प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया: ग्राम कटंगी में विशेष बैठक
शीतलाल निर्मलकर से जुड़े सामाजिक बहिष्कार प्रकरण को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया। 11 फरवरी 2026 को ग्राम कटंगी में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) की संयुक्त उपस्थिति में ग्राम पंचायत भवन में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्राम सरपंच, पंचगण, निर्मलकर समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना, दबाव बनाना या सामुदायिक भेदभाव करना कानूनन दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने दो टूक कहा कि गांव की शांति और सामाजिक समरसता से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि किसी भी प्रकार के विवाद, मतभेद या सामाजिक असहमति की स्थिति में कानून हाथ में लेना उचित नहीं है। समस्याओं का समाधान संवाद, आपसी सहमति और पंचायत एवं प्रशासनिक माध्यमों से ही किया जाना चाहिए। सभी पक्षों की बातें गंभीरता से सुनी गई और आपसी समझ एवं सहयोग से विवाद सुलझाने पर बल दिया गया।
बैठक में ग्राम सरपंच और समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीणों ने भी गांव में आपसी भाईचारा, सौहार्द और शांति बनाए रखने का संकल्प दोहराया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की सतत निगरानी रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
विश्लेषण: क्यों उठाना पड़ा आत्मदाह जैसा खौफनाक कदम
सवाल यह है कि सालों से अपनी मांग लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे शीतलाल की सुनवाई क्यों नहीं हुई। न्याय और प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में, व्यक्ति मानसिक रूप से हताश होकर ऐसा खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हो जाता है। यह घटना न केवल ग्रामीण स्तर पर सामाजिक बहिष्कार की गंभीरता को उजागर करती है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और समय पर प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े करती है।
फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक असमानता और बहिष्कार के मामलों में गंभीरता से हस्तक्षेप किया जाएगा और भविष्य में किसी भी तरह की उपेक्षा या अवांछित गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


