खबरों का प्रहरी न्यूज. साइबर ठगी प्रकरण में बड़ी सफलता: करोड़ों के लेन-देन का फरार आरोपी गिरफ्तार
खैरागढ़. साइबर अपराध के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत जिला खैरागढ़–छुईखदान–गंडई पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल से प्राप्त महत्वपूर्ण इनपुट के आधार पर पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन का खुलासा करते हुए एक फरार म्युल खाता धारक को गिरफ्तार किया है। इससे पूर्व इस प्रकरण में तीन म्युल खाताधारकों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा चुका है।
पुलिस जांच में सामने आया कि ऑनलाइन साइबर फ्रॉड के माध्यम से प्राप्त भारी धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के जरिए घुमाया जा रहा था। जांच के दौरान बैंक ऑफ महाराष्ट्र, शाखा खैरागढ़ के तीन खातों—यज्ञदत्त यादव, भोजराम वर्मा एवं नारद रजक—में साइबर ठगी से प्राप्त कुल ₹8 करोड़ 65 लाख 16 हजार 376 रुपये का संदिग्ध लेन-देन पाया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने अपने खातों का उपयोग अवैध धन के हेरफेर के लिए किया।
मामले में थाना खैरागढ़ में अपराध क्रमांक 519/25 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत विवेचना प्रारंभ की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा विशेष अनुसंधान टीम का गठन किया गया, जिसने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र के माध्यम से आरोपियों की निगरानी की।
पूछताछ में तीनों म्युल खाता धारकों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी, जिन्हें 15 नवंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। विवेचना के दौरान एक अन्य आरोपी चुरेन्द्र वर्मा, निवासी खजरी (थाना घुमका) की भूमिका भी सामने आई, जो गिरफ्तारी के बाद से फरार था और नाम-पता बदलकर रायपुर में छिपा हुआ था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें अपराध स्वीकार करने एवं पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे भी न्यायालय में प्रस्तुत कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। केसीजी पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक सशक्त संदेश मानी जा रही है कि म्युल खातों के माध्यम से ठगी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।




